बीसीसीआई सचिव की नियुक्ति पर सवाल, पूर्व क्रिकेटर ने भेजा लीगल नोटिस  

बीसीसीआई सचिव देवजीत को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई. आरोप लगा है कि नियम को अनदेखा कर वह एक साथ दो पद पर बने हैं. ऐसे में मामला लीगल नोटिस तक पहुंच गया. पूर्व क्रिकेटर मकानी ने लीगल नोटिस भेज कर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाया है.

बीसीसीआई सचिव की नियुक्ति पर सवाल, पूर्व क्रिकेटर ने भेजा लीगल नोटिस

रांची (RANCHI): बीसीसीआई सचिव देवजीत को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई. आरोप लगा है कि नियम को अनदेखा कर वह एक साथ दो पद पर बने हैं. ऐसे में मामला लीगल नोटिस तक पहुंच गया. पूर्व क्रिकेटर मकानी ने लीगल नोटिस भेज कर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाया है. जिसमें अब कोर्ट में सुनवाई होगी और आगे कानूनी दाव पेंच देखने को मिलेगा.    

दरअसल झारखंड के आजीवन सदस्य एवं पूर्व क्रिकेटर नरेश हिम्मत लाल मकानी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के वर्तमान सचिव देवजीत सैकिया के एक साथ दो महत्वपूर्ण पदों पर बने रहने को लेकर गंभीर कानूनी सवाल उठाए हैं. सैकिया असम के एडवोकेट जनरल के संवैधानिक पद पर हैं. साथ ही सचिव की जिम्मेवारी भी निभा रहे है.ऐसे में मकानी का मानना है कि इन दोनों पदों पर एक साथ बने रहने की वैधानिक पात्रता और इससे उत्पन्न होने वाले संभावित हितों के टकराव की स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा की जरूरत है.

मकानी के अनुसार  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 9 अगस्त 2016 को दिए गए आदेश और क्रिकेट प्रशासन में सुधार के लिए स्वीकार की गई लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक इस मामले की जांच होनी चाहिए. उन्होंने इस विषय पर बीसीसीआई को औपचारिक कानूनी नोटिस भेज दिया है और अब बॉम्बे हाई कोर्ट में कानूनी याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं.

मकानी का कहना है कि बीसीसीआई देश में क्रिकेट का सर्वोच्च संचालन निकाय है और उसके पदाधिकारियों से पारदर्शिता, जवाबदेही और लागू नियमों के पूर्ण अनुपालन की अपेक्षा की जाती है. इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसी राज्य के एडवोकेट जनरल जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति का बीसीसीआई सचिव के पद पर बने रहना संबंधित संवैधानिक प्रावधानों, अधिवक्ताओं पर लागू नियमों और  बीसीसीआई के संविधान के अनुरूप है या नहीं.

उन्होंने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध व्यक्तिगत अभियान नहीं, बल्कि क्रिकेट प्रशासन की संस्थागत विश्वसनीयता और कानून के समान अनुपालन से जुड़ा प्रश्न है.अगर नीयमों की व्याख्या या अनुपातन को लेकर कोई संदेह है, तो उसका निराकरण सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए.

मकानी ने बीसीसीआई से अपेक्षा की है कि वह भेजे गए कानूनी नोटिस पर अपना औपचारिक पक्ष स्पष्ट करे साथ ही संबंधित नियमों और न्यायिक आदेशों के अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक करे. उन्होंने कहा कि वह इस मामले की न्यापिक परीक्षण के लिए सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के अपने अधिकार का उपयोग करेंगे.

नरेश हिम्मत ताल मकानी ने दोहराया कि क्रिकेट प्रशासन में किसी भी पदाधिकारी की पात्रता का निर्धारण व्यक्तिगत प्रभाव या पद के आधार पर नहीं, बल्कि लागू कानून, नियमों और न्यायिक आदेशों के आधार पर होना चाहिए.