रांची (RANCHI): राज्य में चल रहे JPSC विवादों के बीच बीते दिनों जो हुआ वह जवाबदेही का मसला है या जांच की आंच का नतीजा है यह कह पाना मुश्किल है. बीते मंगलवार को खबरें 14वीं JPSC परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई और देर रात जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे तक आकार रुकी. वही आज भाजपा की तरफ से JPSC कार्यालय घेराव की भी तैयारी है. ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है की क्या इन सभी विवादों के बीच परीक्षा रद्द होगी?
दरअसल अब तक सरकार या आयोग की ओर से मुख्य परीक्षा रद्द करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में फिलहाल जांच एजेंसियां परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच में जुटी हैं. वहीं मंगलवार को सीआईडी ने जेपीएससी मुख्यालय सहित सात स्थानों पर एक साथ छापेमारी की. जांच के दायरे में आयोग के कुछ अधिकारी, कर्मचारी और परीक्षा कार्य से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPPL) भी शामिल है. जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इनकी जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी.
दूसरी ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लगातार जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही थीं. आयोग के एक सदस्य सहित कई लोगों ने भी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे. इसके बाद सरकार के निर्देश पर सीआईडी ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की और छापेमारी की कार्रवाई की गई. बताया जा रहा है कि जांच के दौरान आयोग और संबंधित एजेंसी से जुड़े कई लोगों से पूछताछ भी की जा रही है.
जांच के केंद्र में आई टीडीपीपीएल एजेंसी पहले भी विवादों में रह चुकी है. वर्ष 2025 में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने कथित अनियमितताओं के आरोप में इस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था. इसके बावजूद यह एजेंसी जेपीएससी की कई महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में आवेदन प्रक्रिया, एडमिट कार्ड, प्रश्नपत्र प्रिंटिंग, ओएमआर स्कैनिंग, उत्तर पुस्तिका प्रोसेसिंग और रिजल्ट तैयार करने जैसे संवेदनशील कार्य करती रही. उत्तर प्रदेश में भी इस एजेंसी को पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है.
छापेमारी के बीच जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं.
जांच के दौरान एक और सवाल सामने आया है कि उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का तबादला होने के बावजूद वह लंबे समय तक आयोग के कार्यों से जुड़ी क्यों रहीं. जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि उनके अधिकार क्षेत्र और भूमिका क्या थी. जेपीएससी का नाम पहले भी कई भर्ती परीक्षाओं के विवादों से जुड़ता रहा है. सिविल सेवा, इंजीनियर भर्ती, वन सेवा, सहायक वन संरक्षक, कार्यपालक अभियंता और अन्य परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं. कई मामलों की जांच पहले से विभिन्न एजेंसियों के पास लंबित है और कुछ मामले न्यायालय में भी विचाराधीन हैं.
सीआईडी की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 14वीं जेपीएससी की मुख्य परीक्षा पर इसका असर पड़ेगा. फिलहाल मुख्य परीक्षा रद्द करने या स्थगित करने का कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है. जांच जारी है और आगे का फैसला जांच रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों तथा सरकार एवं आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगा. ऐसे में मुख्य परीक्षा को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी स्पष्ट कहा है कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है. उन्होंने कहा, "न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ भी दिखना चाहिए." मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं अभ्यर्थियों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं.

