रांची (RANCHI): झारखंड के चर्चित निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हजारीबाग में उपायुक्त (DC) के कार्यकाल के दौरान कथित जमीन घोटाले से जुड़े मामले में शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के बाद उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की. इस फैसले के बाद करीब एक वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद विनय चौबे के रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है. उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में उन्हें पहले ही राहत मिल चुकी है, इसलिए अब कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई संभव होगी. इससे पहले 28 अप्रैल को झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद विनय चौबे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ताओं ने दलील दी कि इस मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और यह मामला वर्ष 2009-10 के कार्यकाल से संबंधित है.
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई ये शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए विनय चौबे को कई शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि वे बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे, मामले से जुड़े किसी भी गवाह को प्रभावित करने या संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हजारीबाग जिले में खासमहल, सेवायत और वनभूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है. आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन की प्रकृति बदलकर उसे निजी लोगों के नाम हस्तांतरित किया गया. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 दर्ज किया था और 20 मई 2025 को विनय चौबे को गिरफ्तार किया था. तब से वे न्यायिक हिरासत में थे.
73 लोग हैं नामजद आरोपी
एसीबी की प्राथमिकी में विनय चौबे के अलावा उनके करीबी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचलाधिकारी शैलेश कुमार, ब्रोकर विजय सिंह समेत कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी जमीन के हस्तांतरण में नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं.
अन्य मामलों में भी चल रही जांच
विनय चौबे पर हजारीबाग भूमि घोटाले के अलावा बहुचर्चित शराब घोटाला (उत्पाद नीति 2022), आय से अधिक संपत्ति और अन्य मामलों में भी जांच चल रही है. हालांकि इन मामलों में उन्हें पहले ही स्थानीय अदालतों या तकनीकी आधार (डिफॉल्ट बेल) पर राहत मिल चुकी है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से भूमि घोटाला मामले में जमानत मिलने के बाद अब उनके जेल से बाहर आने की राह लगभग साफ हो गई है.

