JSSC CGL परीक्षा में गड़बड़ी कर अधिकारी बने 100 से ज्यादा लोग CID की रडार पर, कभी भी हो सकती है गिरफ़्तारी
JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच में 100 से अधिक सफल अभ्यर्थी CID की जांच के घेरे में हैं, जबकि अब तक 36 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
रांची (RANCHI): झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID की विशेष जांच टीम (SIT) को लगातार नए सुराग मिल रहे हैं. एजेंटों से पूछताछ के आधार पर जांच टीम कथित परीक्षा सिंडिकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. जांच में अब तक 100 से अधिक ऐसे सफल अभ्यर्थियों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है, जिन पर कथित तौर पर गलत तरीके से परीक्षा पास करने का संदेह है. इनमें से 10 अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. SIT अब अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
दो महीने में 36 आरोपियों की गिरफ्तारी
परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच शुरू होने के करीब दो महीने में CID ने अब तक 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच के दौरान सामने आ रहे नए तथ्यों के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की जा रही है. हालांकि, अब तक JSSC के किसी अधिकारी या कर्मचारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. CID का फोकस फिलहाल कथित एजेंटों, परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों के बीच संपर्क की कड़ियों को समझने पर है. पूछताछ के दौरान सामने आ रही जानकारियों के आधार पर SIT कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
ICN कर्मचारियों से फिर पूछताछ
परीक्षा संचालन का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी ICN से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. एजेंसी के संचालक मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है. CID अब मिथिलेश सिंह से जुड़े कथित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. इसी क्रम में ICN के कर्मचारी सोमांश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया गया था. दोनों से पहले भी पूछताछ हो चुकी है. अब CID ने उन्हें दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है. जांच एजेंसी को उम्मीद है कि दोनों से मिली जानकारी के आधार पर परीक्षा संचालन से जुड़े अन्य लोगों और कथित तौर पर गलत तरीके से सफल हुए अभ्यर्थियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी.
JPSC और JSSC जांच में अलग तस्वीर
CID JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच अलग-अलग SIT के माध्यम से कर रही है. दोनों मामलों में अब तक हुई कार्रवाई का पैटर्न अलग नजर आता है. JSSC CGL मामले में कथित एजेंटों और परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी प्रमुख रूप से सामने आई है. वहीं, JPSC मामले में तत्कालीन चेयरमैन IAS एल खियांग्ते, परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
कथित फर्जी तरीके से सफल अभ्यर्थियों पर कार्रवाई
CID की कार्रवाई में TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी, उनकी पत्नी सुषमा कुमारी, भाई अक्षय तिवारी, दीपक कुमार, फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार, समीर कुमार, आनंद कुमार सिंह, कुंदन कुमार, उमेश कुमार, विजय कुमार तिवारी, अजय कुमार और रामकृष्ण कुमार सिंह समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इन पर परीक्षा में कथित तौर पर गलत तरीके से सफलता हासिल करने का आरोप है.
पैसे लेकर पास कराने के आरोप में एजेंट भी गिरफ्तार
जांच के दौरान अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लेकर उन्हें परीक्षा में सफल कराने के आरोप में भी कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें छपरा के मनु कुमार सिंह, देवघर के सुधाकर यादव, पटना के राजन कुमार और दिलीप कुमार पासवान, कोडरमा के संदीप कुमार तथा राजेश प्रसाद यादव शामिल हैं. CID के अनुसार, इनमें से कई आरोपी कथित तौर पर अभय तिवारी से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा थे. CID इससे पहले भी इस मामले की जांच कर चुकी है. उस दौरान 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी शामिल थे. अब SIT नए इनपुट के आधार पर कथित सिंडिकेट की बाकी कड़ियों को जोड़ने और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है.