रांची (RANCHI): बुंडू प्रखंड के ताऊ मौजा स्थित गैरमजरूवा आम मुरदाघाटी की जमीन पर ट्राइबल मल्टीपरपज मार्केटिंग सेंटर के निर्माण को लेकर विवाद बढ़ गया है. स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जिस भूमि पर वर्षों से अंतिम संस्कार और दफन का कार्य होता रहा है, उसी जमीन पर झारखंड सरकार के कल्याण विभाग की ओर से भवन निर्माण कराया जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन मौजा ताऊ, खाता संख्या 102, प्लॉट संख्या 1248, रकबा 9 एकड़ 17 डिसमिल में दर्ज है और आरएस खतियान में इसे गैरमजरूवा खास मुरदाघाटी के रूप में दर्ज किया गया है. ऐसे में इस भूमि का अन्य किसी उद्देश्य के लिए उपयोग स्थानीय लोगों की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य नहीं रोका गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्य के साथ-साथ कुछ भू-माफियाओं ने भी इस जमीन पर अतिक्रमण कर खरीद-बिक्री की है. स्थानीय लोगों के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान प्रशासन ने आपातकालीन व्यवस्था के तहत इसी स्थान पर अस्थायी सब्जी बाजार लगाने की अनुमति दी थी, जो आज भी सुबह 6 बजे से 10 बजे तक संचालित होता है. यहां स्थानीय ग्रामीण छोटी-छोटी झोपड़ियों में सब्जी की दुकान लगाकर अपनी आजीविका चलाते हैं. सामाजिक कार्यकर्ता धीरेंद्रनाथ महतो, देवनाथ कुशवाहा, भुवनेश्वर महतो, लक्ष्मण महतो, महिंद्र प्रसाद महतो और खुदीराम महतो का कहना है कि इस भूमि का उपयोग पूर्वजों के समय से अंतिम संस्कार और दफन के लिए किया जाता रहा है, इसलिए इसकी मूल प्रकृति को किसी भी हाल में बदला नहीं जाना चाहिए.
स्थानीय नागरिक सहदेव महतो, बृजेंद्र महतो, देवीलाल साहू, सुशांत चंद्र समेत कई ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और इसके संरक्षण की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि अंचल कार्यालय बुंडू के पंजी-2 में भी खाता संख्या 102 बिहार सरकार के नाम दर्ज है और जमीन की प्रकृति स्पष्ट रूप से मुरदाघाटी दर्शाई गई है. इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने झारखंड के राज्यपाल, मुख्य सचिव, भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के सचिव, रांची के उपायुक्त, बुंडू के अनुमंडल पदाधिकारी और अंचल अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य और अतिक्रमण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करता है तो स्थानीय लोग लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करेंगे.

