झारखंड में शिक्षकों के तबादले की नई तैयारी, शहर से गांव और गांव से शहर भेजे जाएंगे शिक्षक
झारखंड में शिक्षकों के तबादले के लिए नई ट्रांसफर पॉलिसी के तहत प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है. प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए एक ही ऑनलाइन पोर्टल होगा. नई व्यवस्था में लंबे समय से शहरों में तैनात शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में कार्यरत शिक्षकों को शहरी क्षेत्रों में आने का मौका मिल सकता है.
रांची(RANCHI): झारखंड में लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए राहत की खबर है. शिक्षा विभाग नई ट्रांसफर पॉलिसी के तहत शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है. इसके लिए नई नियमावली तैयार कर ली गई है और विभागीय सचिव की सहमति भी मिल गई है.
नई व्यवस्था का असर राज्य के करीब 2800 माध्यमिक स्कूलों और 21,179 प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों पर पड़ेगा. खास बात यह है कि प्राथमिक और माध्यमिक दोनों स्कूलों के शिक्षकों के तबादले के लिए एक ही ऑनलाइन पोर्टल होगा.
माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद के मुताबिक विभाग की तैयारी पूरी हो चुकी है और पोर्टल जल्द लॉन्च किया जाएगा. सितंबर में ही पोर्टल खोलने की तैयारी है, जिसके बाद शिक्षक ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.
गांव से शहर और शहर से गांव होगा तबादला
नई नीति में लंबे समय से ग्रामीण और दूर-दराज के स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों को शहरी क्षेत्रों में आने का मौका मिल सकता है. वहीं शहर और नगर निकाय क्षेत्र के स्कूलों में लंबे समय से जमे शिक्षकों को ग्रामीण इलाकों में भेजा जा सकता है.
इसके लिए माध्यमिक स्कूलों को पांच जोन में बांटा गया है. पहले जोन में नगर निगम और नगर निकाय क्षेत्र के स्कूल होंगे. दूसरे जोन में जिला मुख्यालय और उसके पांच किलोमीटर के दायरे के स्कूल रखे गए हैं.
तीसरे जोन में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग के आसपास के स्कूल, चौथे जोन में प्रखंड मुख्यालय से पांच किलोमीटर से अधिक दूरी वाले स्कूल और पांचवें जोन में अन्य दूरस्थ स्कूलों को रखा गया है.
नई व्यवस्था में पहले और दूसरे जोन में पांच साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को चौथे और पांचवें जोन में भेजने का प्रावधान रखा गया है.
इससे पहले नवंबर 2025 में भी शिक्षकों के तबादले के लिए पोर्टल खोला गया था. उस समय करीब दो हजार शिक्षकों ने आवेदन किया था, लेकिन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी.
विभाग ने पुराने आवेदनों की समीक्षा भी की. इसमें सामने आया कि एक ही जगह पांच साल से काम कर रहे कई शिक्षकों ने दोबारा शहरी क्षेत्रों के लिए ही आवेदन किया था. इसी को देखते हुए इस बार नियमों को सख्त किया गया है, ताकि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती में बेहतर संतुलन बनाया जा सके.