CAG की रिपोर्ट में PM आवास योजना को लेकर बड़ा खुलासा, 6.32 लाख पात्र परिवार छूटे और 2.90 लाख अपात्रों को मिला लाभ
झारखंड में PM आवास योजना को लेकर CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. 6.32 लाख पात्र परिवार योजना से बाहर रह गए, जबकि 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए.
रांची (RANCHI): झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन को लेकर CAG की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, योजना के लिए उपलब्ध राशि का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका, वहीं लाभुकों की सूची तैयार करने में हुई देरी के कारण लाखों पात्र परिवार योजना से बाहर रह गए. दूसरी ओर, बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम भी सूची में शामिल कर दिए गए, जो योजना के लिए पात्र नहीं थे. विधानसभा के मानसून सत्र में पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में 2019 से 2024 के बीच योजना के क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन किया गया है. इसके लिए बोकारो, दुमका, गिरिडीह, पलामू, रामगढ़ और सिमडेगा जिले के 12 प्रखंडों की 60 ग्राम पंचायतों में नमूना जांच की गई.
लाभुकों की सूची में बड़ी गड़बड़ी
CAG की जांच में सामने आया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए तैयार लाभुकों की सूची में 2.90 लाख ऐसे लोगों को शामिल कर लिया गया था, जो योजना के मानकों के अनुसार पात्र नहीं थे. हालांकि बाद में ग्राम सभाओं के स्तर पर ऐसे नामों को सूची से हटाया गया. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जांच के लिए चुनी गई 60 ग्राम पंचायतों में स्थायी प्रतीक्षा सूची तैयार करने से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे. वर्ष 2016 से नवंबर 2022 के बीच 22.34 लाख पात्र परिवारों की सूची तैयार की गई थी, लेकिन इसमें भी कई खामियां पाई गईं.
देरी से 6.32 लाख परिवार योजना से बाहर
CAG के मुताबिक लाभुकों की सूची को अंतिम रूप देने में करीब दो साल की देरी हुई. इसका सीधा असर पात्र परिवारों पर पड़ा. 22.34 लाख योग्य परिवारों के मुकाबले केंद्र से सिर्फ 16.02 लाख आवास ही आवंटित किए जा सके. इस तरह करीब 6.32 लाख पात्र परिवार, यानी लगभग 28 प्रतिशत परिवार योजना के लाभ से बाहर रह गए. हालांकि, 2016 से 2024 के दौरान आवंटित 16.02 लाख आवासों में से राज्य सरकार ने 15.92 लाख आवासों को स्वीकृति दी. जनवरी 2025 तक इनमें से 15.62 लाख मकानों का निर्माण पूरा हो चुका था.
20 हजार करोड़ से ज्यादा मिले, खर्च हुए सिर्फ 14 हजार करोड़
CAG ने योजना के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए झारखंड में कुल 20,199.98 करोड़ रुपये उपलब्ध थे. लेकिन राज्य सरकार इनमें से 14,113.07 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी. यानी उपलब्ध राशि का करीब 70 प्रतिशत ही इस्तेमाल हुआ. रिपोर्ट में केंद्र के हिस्से की राशि को स्टेट नोडल अकाउंट यानी SNA में ट्रांसफर करने में भी देरी का उल्लेख है. 2019 से 2024 के दौरान कई मौकों पर राशि ट्रांसफर करने में देरी हुई और यह देरी अधिकतम 92 दिनों तक रही. इसके कारण राज्य सरकार पर 22.39 करोड़ रुपये ब्याज की देनदारी बनी.
मकान बनने की रफ्तार बेहतर, लेकिन चयन प्रक्रिया पर सवाल
CAG रिपोर्ट की सबसे अहम बात यह है कि एक तरफ स्वीकृत मकानों के निर्माण की उपलब्धि करीब 98 प्रतिशत रही, लेकिन दूसरी तरफ लाभुकों के चयन और सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर कमियां सामने आईं. जिन मकानों को सामान्य तौर पर एक साल के भीतर पूरा किया जाना था, उन्हें पूरा करने में कई मामलों में तीन साल तक का समय लगा. इसके बावजूद बड़ी संख्या में स्वीकृत आवासों का निर्माण पूरा किया गया.
CAG रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल
कुल मिलाकर CAG की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन की दो अलग तस्वीर सामने आती है. निर्माण के मोर्चे पर राज्य का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, लेकिन पात्र परिवारों की पहचान, लाभुक सूची, प्रतीक्षा सूची और राशि के इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं. एक ओर 6.32 लाख योग्य परिवार योजना के दायरे से बाहर रह गए, तो दूसरी ओर 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए. ऐसे में CAG की रिपोर्ट ने झारखंड में PMAY-G के क्रियान्वयन और लाभुक चयन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं.