NTPC अधिकारियों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, मारपीट-धमकी केस की पूरी कार्यवाही हुई रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने NTPC के चार अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए हजारीबाग की निचली अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी.

NTPC अधिकारियों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, मारपीट-धमकी केस की पूरी कार्यवाही हुई रद्द

रांची (RANCHI): झारखंड हाईकोर्ट ने एनटीपीसी के चार अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ हजारीबाग की निचली अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है. जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने हजारीबाग के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की ओर से 13 नवंबर 2025 को लिए गए संज्ञान और शिकायत वाद संख्या 1834/2024 से जुड़ी पूरी कार्यवाही को समाप्त कर दिया. यह मामला एनटीपीसी के अधिकारी नीरज जलोटा, कमलराम रजक, पंकज ध्यानी और संजीत कुमार सेनापति से जुड़ा था. अधिकारियों की ओर से हाईकोर्ट में अधिवक्ता कुमार हर्ष ने पक्ष रखा. अदालत के फैसले के बाद चारों अधिकारियों के खिलाफ इस मामले में चल रही आपराधिक कार्रवाई पर विराम लग गया है.

क्या था पूरा मामला?
हजारीबाग निवासी मोहम्मद सजाद आलम ने एनटीपीसी के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप था कि उन्हें कंप्यूटर प्रशिक्षण से संबंधित काम के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन नियुक्ति की शर्तों के मुताबिक उन्हें काम नहीं दिया गया और भुगतान भी नहीं किया गया. शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया था कि 25 मई 2024 को एनटीपीसी के अधिकारी उसके घर पहुंचे और उसके साथ मारपीट की. साथ ही, झूठे मामले में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था. इन आरोपों के आधार पर हजारीबाग की निचली अदालत ने मामले में संज्ञान लिया था.

मारपीट के आरोप पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा की. अदालत ने पाया कि शिकायत में कथित मारपीट के बावजूद किसी तरह की शारीरिक चोट या दर्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था. अदालत ने माना कि महज मारपीट का आरोप, जब उसमें चोट या शारीरिक पीड़ा का कोई उल्लेख नहीं हो, आईपीसी की धारा 323 के तहत अपराध गठित करने के लिए पर्याप्त नहीं है.

धारा 504 के आरोप पर भी कोर्ट की टिप्पणी
शिकायत में अधिकारियों पर अपमान और धमकी से संबंधित आरोप भी लगाए गए थे. इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अपमान का आरोप अपने आप में आईपीसी की धारा 504 के तहत अपराध नहीं बनाता. इसके लिए ऐसा उकसावा होना जरूरी है जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की स्थिति पैदा हो सकती हो. सुनवाई के दौरान अदालत के सवालों के जवाब में शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि वह एनटीपीसी में नौकरी हासिल करना चाहता था. कोर्ट ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए माना कि आपराधिक शिकायत के पीछे अधिकारियों पर नौकरी के लिए दबाव बनाने की मंशा भी दिखाई देती है.

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की पूरी कार्यवाही?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों को सही मान लेने के बावजूद अधिकारियों के खिलाफ संबंधित अपराधों के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते. ऐसे में आपराधिक मुकदमे को आगे जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. इसी आधार पर अदालत ने हजारीबाग न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से लिया गया संज्ञान आदेश और शिकायत से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी. इस फैसले से नीरज जलोटा, कमलराम रजक, पंकज ध्यानी और संजीत कुमार सेनापति को मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है.