झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बैंक लॉकर में रखे स्त्रीधन पर सिर्फ पत्नी का हक, बिना मंजूरी लॉकर नहीं खोल सकेगा पति

झारखंड हाईकोर्ट ने स्त्रीधन को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि बैंक लॉकर में रखे पत्नी के गहनों पर उसका अधिकार है. पति बिना पत्नी की सहमति लॉकर नहीं चला सकता.

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बैंक लॉकर में रखे स्त्रीधन पर सिर्फ पत्नी का हक, बिना मंजूरी लॉकर नहीं खोल सकेगा पति

रांची (RANCHI): पति-पत्नी के बीच संपत्ति और स्त्रीधन से जुड़े विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ किया कि महिला के स्त्रीधन पर उसका पूरा अधिकार है और पति पत्नी की जानकारी या सहमति के बिना उस लॉकर को संचालित नहीं कर सकता, जिसमें उसके गहने रखे हैं. अदालत ने इस मामले में पति की अपील को खारिज करते हुए बोकारो फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा. यह फैसला जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच ने बोकारो निवासी अनिल कुमार सिंह की ओर से दायर प्रथम अपील पर सुनाया.

मामला बोकारो के बीएस सिटी स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के लॉकर नंबर GB-69 से जुड़ा है. यह लॉकर अनिल कुमार सिंह और उनकी पत्नी प्रिया राज के संयुक्त नाम पर था. प्रिया राज का कहना था कि शादी के दौरान मायके और ससुराल से मिले करीब 25 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण उनके स्त्रीधन हैं. सुरक्षा के लिहाज से इन गहनों को बैंक लॉकर में रखा गया था. बाद में पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ और पत्नी को घर छोड़ना पड़ा. आरोप है कि इसके बाद उनका स्त्रीधन लॉकर में ही रह गया. प्रिया ने अपने गहने वापस लेने की मांग की, लेकिन उनका कहना था कि पति ने आभूषण लौटाने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्होंने फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और लॉकर को उनकी जानकारी या अनुमति के बिना संचालित करने पर रोक लगाने की मांग की.

अनिल कुमार सिंह ने पत्नी के आरोपों से इनकार किया. उनका दावा था कि प्रिया अपना पूरा स्त्रीधन पहले ही अपने साथ ले जा चुकी हैं. पति ने यह भी कहा कि लॉकर में मौजूद बाकी आभूषण उनकी मां, बहन और भाभी के हैं. हालांकि, हाईकोर्ट के सामने पति अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सके. अदालत ने यह भी गौर किया कि जिन परिवार के सदस्यों के गहने होने का दावा किया गया था, उनमें से किसी को भी गवाही के लिए अदालत में पेश नहीं किया गया.

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी अपने बयान पर कायम रही और उसके दावे को अविश्वसनीय मानने का कोई ठोस आधार नहीं मिला. वहीं, पति यह साबित करने में विफल रहे कि लॉकर में रखे गहने उनकी मां, बहन या भाभी के हैं. अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि पति की मां ने स्वीकार किया था कि संबंधित लॉकर शादी के बाद ही खोला गया था.

सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने बोकारो फैमिली कोर्ट के दिसंबर 2024 के फैसले में किसी तरह की कानूनी गलती नहीं पाई. इसके साथ ही पति की अपील खारिज कर दी गई. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉकर में रखा स्त्रीधन महिला की संपत्ति है. इसलिए पति पत्नी की जानकारी और सहमति के बिना लॉकर का संचालन नहीं कर सकता. फैसला पति-पत्नी के बीच स्त्रीधन को लेकर कानूनी अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.