रांची (RANCHI): 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा को लेकर विवाद अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है. परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए झारखंड हाईकोर्ट में प्रिलिम्स परीक्षा को रद्द करने की मांग वाली याचिका दायर की गई है. इस मामले में याचिकाकर्ता राजेश प्रसाद ने खुद अदालत में अपना पक्ष रखने का फैसला किया है. हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले की अगली विस्तृत सुनवाई गुरुवार के लिए निर्धारित की है.
याचिका में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कई सवाल उठाए गए हैं. इसमें कहा गया है कि आयोग ने अब तक कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए हैं, जबकि अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट भी अपलोड नहीं की गई. इसके अलावा परीक्षा परिणाम से जुड़े दस्तावेजों में अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने का मुद्दा भी अदालत के समक्ष रखा गया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि इन सभी बिंदुओं से चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं.
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 418 अभ्यर्थियों के चयन को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है. याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और परीक्षा प्रक्रिया की वैधता की न्यायिक समीक्षा की मांग की है. सिर्फ यही नहीं, अदालत के समक्ष परीक्षा से जुड़ी अन्य कथित अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों का भी उल्लेख किया गया है. इन सभी पहलुओं पर हाईकोर्ट में विस्तार से सुनवाई होगी, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी.
बुधवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत बहस के लिए गुरुवार की तारीख तय की. इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत में होगी. याचिकाकर्ता राजेश प्रसाद ने बताया कि वह किसी अधिवक्ता के बजाय स्वयं अदालत में अपना पक्ष रखेंगे. अब अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है. माना जा रहा है कि इस मामले में अदालत की अगली कार्यवाही 14वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े विवाद पर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है.

