रांची (RANCHI): राजधानी रांची के नामकुम अंचल में करोड़ों रुपये के कथित जमीन घोटाले और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मामले में प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज कर जांच की रफ्तार तेज कर दी है. इस मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ PE संख्या 3/2026 दर्ज की गई है.
दरअसल, ACB की गोपनीय जांच में जमीन के दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं और रिकॉर्ड में कथित बदलाव के संकेत मिले थे. इसके आधार पर 15 जुलाई को प्रारंभिक जांच दर्ज की गई. इससे पहले 8 मई को एजेंसी ने राज्य सरकार से जांच की अनुमति मांगी थी.
2012 से 2015 तक के अधिकारी भी जांच के दायरे में
ACB अब इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए वर्ष 2012-13 से 2014-15 के बीच नामकुम अंचल में पदस्थापित रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी खंगालेगी. जानकारी के मुताबिक, अगले सप्ताह से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.
जांच का केंद्र धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता संख्या 32 और प्लॉट संख्या 776, 820, 821 व 822 की कुल 1.22 एकड़ जमीन है. शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी मां ने तीन अलग-अलग पंजीकृत बिक्री विलेख (सेल डीड) के जरिए कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी. परिवार वर्षों तक इस जमीन पर खेती करता रहा और मां के निधन के बाद पारिवारिक बंटवारे के तहत शिकायतकर्ता खुद को इसका वैध उत्तराधिकारी बताते हैं.
शिकायतकर्ता के अनुसार, 17 अगस्त 2016 को उन्हें अंचल कार्यालय से दोहरी जमाबंदी से संबंधित नोटिस मिला. जब उन्होंने कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच कराई तो पता चला कि उसी जमीन के एक हिस्से की नई जमाबंदी 'प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से दर्ज कर दी गई है.
अब ACB यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के रिकॉर्ड में कथित बदलाव किन परिस्थितियों में किया गया, दूसरी जमाबंदी किसके आदेश पर कायम हुई और इसमें तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों की क्या भूमिका रही. हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई इस जांच में आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ होने की संभावना है.

