JPSC Scam: ख्यांगते साहब की पेनड्राइव का क्या है राज़? अब CID खोलेगी सिंडिकेट का कच्चा-चिट्ठा

JPSC परीक्षा घोटाले की CID जांच में पेन ड्राइव, OMR शीट, डिजिटल साक्ष्यों और कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर कई गंभीर खुलासे हुए हैं.

JPSC Scam: ख्यांगते साहब की पेनड्राइव का क्या है राज़? अब CID खोलेगी सिंडिकेट का कच्चा-चिट्ठा

रांची (RANCHI): झारखंड में जैसे-जैसे परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर परत-दर-परत खुलती जा रही है वैसे-वैसे कई राज़ के ऊपर से पर्दा हटता जा रहा है. इसी कड़ी में झारखंड लोक सेवा आयोग यानि JPSC परीक्षा अनियमितता और भ्रष्टाचार की जांच में नए खुलासे हुए हैं. दरअसल तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की जमानत याचिका के विरोध में CID की ओर से कोर्ट में दाखिल हलफनामे में डिजिटल साक्ष्यों से कथित छेड़छाड़, परीक्षा एजेंसी से जुड़े लेनदेन और OMR शीट में हेरफेर जैसे गंभीर दावे किए गए हैं, जिसके बाद पेन ड्राइव के राज को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है.

CID के मुताबिक, 22 जुलाई 2026 को JPSC कार्यालय में छापेमारी के बाद एल. ख्यांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दिया और सरकारी लैपटॉप व पेन ड्राइव अपने साथ ले गए थे. बाद में इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई गई. एजेंसी का दावा है कि डिवाइस से डेटा डिलीट किए जाने और हार्ड डिस्क में खरोंच के जरिए डिजिटल साक्ष्यों को नुकसान पहुंचाने के संकेत मिले हैं. जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि ख्यांग्ते के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड में परीक्षा से जुड़े संदिग्ध लोगों और बिचौलियों से लगातार संपर्क के संकेत मिले. साथ ही कथित वित्तीय लेनदेन और कमीशन से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है.

CID की जांच में फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर यानी FRO और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट यानी ACF परीक्षा की OMR शीट भी जांच के दायरे में हैं. एजेंसी के अनुसार, FRO परीक्षा की 350 से अधिक और ACF परीक्षा की करीब 150 से अधिक OMR शीट में कथित तौर पर भौतिक और डिजिटल स्तर पर छेड़छाड़ की गई. यानी दोनों परीक्षाओं की 500 से ज्यादा OMR शीट पर सवाल खड़े हुए हैं. CID का आरोप है कि इस कथित हेरफेर का उद्देश्य कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाना था. 

जांच में परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL की भूमिका भी जांच के केंद्र में है. CID के अनुसार, JSSC ने मई 2025 में TDPL को ब्लैकलिस्ट किया था, इसके बावजूद बाद में JPSC की परीक्षाओं से जुड़े काम इस एजेंसी को दिए गए. CID का दावा है कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने TDPL की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई थी. आरोप है कि एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनसे परीक्षा संबंधी जिम्मेदारी वापस लेकर उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को दे दी गई. तबादले के बाद भी श्वेता के JPSC में बने रहने और परीक्षा से जुड़े संवेदनशील कार्य संभालने की बात भी जांच में सामने आई है.

CID की केस डायरी और जांच में TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की भूमिका भी प्रमुख रूप से सामने आई है. जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा से जुड़े कथित नेटवर्क में आयोग के अधिकारियों, परीक्षा एजेंसी के कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है. CID का आरोप है कि अभ्यर्थियों से परीक्षा में मदद और चयन का भरोसा देकर पैसे लिए जाते थे. कुछ मामलों में मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, ब्लैंक चेक और स्टांप पेपर तक बतौर गारंटी रखे जाने का दावा किया गया है. अभय तिवारी से जुड़े आरोपों और कथित रेट को लेकर भी जांच एजेंसी ने कोर्ट के सामने कई तथ्य रखे हैं.

JPSC मामले के साथ-साथ CID की जांच अब JSSC से जुड़े कथित CGL परीक्षा घोटाले तक भी पहुंच गई है. मंगलवार को CID की टीम JSSC कार्यालय पहुंची और परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की. एजेंसी अभ्यर्थियों, परीक्षा प्रक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच कड़ियां जोड़ने में जुटी है. फिलहाल CID डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, OMR शीट और आरोपियों के बयानों का मिलान कर रही है. कोर्ट में दाखिल हलफनामे और केस डायरी में सामने आए दावों से संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी कथित परीक्षा सिंडिकेट की पूरी संरचना और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को सामने लाने की कोशिश कर रही है. हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा.