JPSC-JSSC छात्रों का आंदोलन जारी, 18 अगस्त तक सरकार को अल्टीमेटम; मांगें नहीं मानीं तो 20 अगस्त को होगा CM आवास घेराव

JPSC-JSSC छात्रों का आंदोलन जारी, 18 अगस्त तक सरकार को अल्टीमेटम; मांगें नहीं मानीं तो 20 अगस्त को होगा CM आवास घेराव

रांची (RANCHI): JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है और अब छात्रों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. आंदोलन के 23वें दिन छात्र नेताओं ने सरकार को 18 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया है. छात्रों का कहना है कि अगर तय समय तक उनकी मांगों पर सरकार ने ठोस फैसला नहीं लिया, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव किया जाएगा. आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि 11वीं से 13वीं JPSC और JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने तथा पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग पर वे किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे. छात्रों का आरोप है कि लगातार आंदोलन और मांगों के बावजूद सरकार की ओर से अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे उनमें नाराजगी और बढ़ रही है.

आंदोलन को तेज करने के लिए छात्रों ने चरणबद्ध कार्यक्रम की घोषणा की है. 15 अगस्त को आंदोलनकारी छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की थी. अब 16 अगस्त को झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन करने का ऐलान किया गया है. रांची में यह कार्यक्रम अलबर्ट एक्का चौक पर आयोजित करने की बात कही गई है. छात्र नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम सरकार तक अपनी नाराजगी पहुंचाने और आंदोलन को व्यापक बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है. छात्रों ने साफ किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा.

छात्र नेताओं के मुताबिक 18 अगस्त तक सरकार को उनकी मांगों पर कार्रवाई का समय दिया गया है. अगर इस अवधि में सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. इस घोषणा के बाद रांची प्रशासन के सामने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर चुनौती बढ़ सकती है. छात्रों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराना है. वहीं, सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं. छात्रों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा.