JPSC विवाद: बाबूलाल के आरोपों पर जमाल अहमद का आया जवाब, जल्द सार्वजनिक करेंगे संपत्ति का पूरा ब्योरा

JPSC विवाद: बाबूलाल के आरोपों पर जमाल अहमद का आया जवाब, जल्द सार्वजनिक करेंगे संपत्ति का पूरा ब्योरा

रांची(RANCHI): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी की ओर से लगाए गए आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इन आरोपों को गलत, बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया है. डॉ. जमाल अहमद ने कहा कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही उनके लिए सबसे जरूरी है.

डॉ. जमाल अहमद ने कहा कि अब तक उन्होंने संवैधानिक पद की मर्यादा को देखते हुए किसी भी आरोप पर सार्वजनिक बयान देने से परहेज किया था. लेकिन लगातार लगाए जा रहे आरोपों से लोगों के बीच गलत संदेश जा रहा था. इसलिए उन्होंने अपना पक्ष रखना जरूरी समझा.

उन्होंने कहा कि अगले पांच दिनों के अंदर वह अपनी सभी चल और अचल संपत्तियों के साथ अपनी आय का पूरा विवरण सार्वजनिक करेंगे. उनका कहना है कि यह कदम सिर्फ सफाई देने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता का उदाहरण पेश करने के लिए उठाया जा रहा है.

वर्ष 2008 के कथित व्याख्याता नियुक्ति मामले को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि वह इस मामले में न तो आरोपी हैं और न ही किसी अदालत ने उन्हें दोषी माना है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ जांच में सबूत मिले हैं, उनके नाम सामने आ चुके हैं. ऐसे में बिना किसी तथ्य के उनका नाम जोड़ना सही नहीं है.

डॉ. जमाल अहमद ने अपने शिक्षक जीवन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के रूप में की थी और उन्हें इस बात पर गर्व है. उन्होंने कहा कि शिक्षक की पहचान ईमानदारी और सम्मान से जुड़ी होती है, जिसे राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए.

उन्होंने अपने परिवार को लेकर भी सफाई दी. उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को JPSC की एक भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह उसमें शामिल नहीं हुईं. उनके दोनों बेटों ने कभी JPSC की किसी परीक्षा के लिए आवेदन नहीं किया और उनके परिवार ने कभी उनके पद का गलत फायदा नहीं उठाया.

डॉ. जमाल अहमद ने कहा कि लोकतंत्र में आरोप तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होने चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन बिना सबूत लगाए गए आरोप समाज में भ्रम पैदा करते हैं.