रांची(RANCHI): खान और खनिज संशोधन बिल को लेकर झारखंड में राजनीतिक तपिश बढ़ गई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसे राज्य के लिए खतरे की घंटी बताई है. साथ ही इस बिल के विरोध में बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया. राज्य से केंद्र सरकार को चुनौती दी गई. इसी कैद में झारखंड मुक्ति मोर्चा की केन्द्रीय समिति की बैठक कर आंदोलन की रूप रेखा तैयार की गई है. पूरे राज्य में कैसे केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन होगा. झामुमो के केन्द्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में रांची के सोहराय भवन में बैठक कर आगे की रणनीति को तय किया गया है.

बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार ने MMDR में बदलाव कर दिया. इस संशोधन से पहले किसी भी राज्य के साथ कोई चर्चा नहीं की गई. इस संशोधन का बड़ा असर झारखंड पर पड़ेगा. यहां के आदिवासी,दलित,अल्पसंख्यक पर इस संशोधन का सीधा असर देखने को मिलेगा. केंद्र सरकार के इस निर्णय से राज्य में बड़ा असर पड़ेगा. इस कानून से वर्तमान के साथ साथ पूर्व के भुगतान पर भी असर डालेगा. केंद्र सरकार राज्य के बकाये के भुगतान को नहीं करेगी.

पूर्व से 1 लाख 35 हजार करोड़ रुपये को भी रोकने का प्लान तैयार किया गया. केंद्र सरकार झारखंड जैसे कमजोर राज्य को खड़ा होते नहीं देखना चाहते है. इस निर्णय से झारखंड पर सीधा असर देखने को मिलेगा. केंद्र के निर्णय से लगता है कि जो विकसित राज्य है केंद्र सरकार उनके लिए अब काम कर रही है. वैसे लोगों को आगे बढ़ाने के लिए पहल कार रही है जो सक्षम है. और जो पिछड़े गरीब अल्पसंख्यक और आदिवासी है उन्हे और पीछे धकलने का काम कर रही है. जहां आज हम विश्व गुरु बनने का ताल ठोक रहे है. उसी जगह एक पिछड़ा राज्य को और पीछे करने की कोशिश की जा रही है. झारखंड इसका विरोध खुल कर करेगा

