झारखंड में जल संरक्षण की नई रणनीति, 80% बह जाने वाले बारिश के पानी को सहेजने पर जोर
JJM Summit 2026 में झारखंड की जल प्रबंधन रणनीति सामने आई, 3,000 करोड़ की सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग मांगा गया.
JJM Summit 2026 में झारखंड की जल प्रबंधन रणनीति सामने आई, 3,000 करोड़ की सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग मांगा गया.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय जल जीवन मिशन (JJM) Departmental Summit 2026 के समापन सत्र में झारखंड ने जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर अपनी योजनाएं साझा कीं. सुषमा स्वराज भवन में हुए सम्मेलन में जल संसाधन विभाग के मंत्री हफीजुल हसन और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने राज्य की जल प्रबंधन रणनीति और आगामी प्राथमिकताओं को सामने रखा.
हफीजुल हसन ने कहा कि झारखंड का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है और राज्य का बड़ा भू-भाग पठारी है. ऐसे में बारिश के पानी को रोकना और उसका बेहतर इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि राज्य में होने वाली करीब 80 प्रतिशत बारिश का पानी बहकर निकल जाता है. सरकार का लक्ष्य इस पानी का अधिक से अधिक संचयन कर इसे पूरे साल उपयोग में लाना है.
मंत्री ने कहा कि झारखंड में करीब 24.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने की संभावना है, लेकिन अभी लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षमता ही तैयार हो पाई है. इसलिए सरकार का जोर नई परियोजनाओं के साथ-साथ पहले से मौजूद सिंचाई ढांचे की क्षमता का बेहतर उपयोग करने पर भी है. नहरों से पानी के रिसाव को कम कर खेतों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं.
झारखंड ने पटमदा-बोड़ाम और नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के साथ पलामू स्थित अमानत बराज के लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए केंद्र से सहयोग मांगा. इन योजनाओं के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई.
सम्मेलन में जलाशयों से गाद हटाने, तालाबों और आहरों के पुनरुद्धार तथा बाढ़ और सूखा प्रबंधन को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई. इसके अलावा रियल-टाइम सूचना प्रणाली, फोरकास्टिंग, AI और Digital Twin जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया.
हफीजुल हसन ने कहा कि राज्यों के बीच अनुभव साझा करने से देश की जल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी. झारखंड सरकार जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के जरिए राज्य को जल-सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.