NewDelhi: दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय Vision 2050 नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के विकास का नया विजन पेश किया. उन्होंने कहा कि अब राज्य को सिर्फ खनिज संपदा नहीं, बल्कि ज्ञान, रिसर्च, AI और इनोवेशन के दम पर आगे बढ़ाना होगा.
झारखंड अब सिर्फ खनिज संपदा वाला राज्य बनकर नहीं रहना चाहता. सरकार की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में राज्य की पहचान रिसर्च, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और इनोवेशन से बने. यही संदेश दिल्ली के होटल ताज में आयोजित दो दिवसीय Vision 2050 National Stakeholders Consultation 2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है कि झारखंड "Mines to Minds" यानी खदानों से आगे बढ़कर दिमाग और ज्ञान की ताकत से अपनी नई पहचान बनाए.
दो दिनों तक चले इस कार्यक्रम में देश और दुनिया के बड़े उद्योगपति, टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिधि, निवेशक, पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ और नीति निर्माता एक मंच पर जुटे. चर्चा सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस बात पर भी मंथन हुआ कि झारखंड को अगले 25 वर्षों में किस दिशा में आगे ले जाना है. सरकार ने साफ किया कि उसका लक्ष्य केवल उद्योग लगाना नहीं, बल्कि रोजगार, बेहतर शिक्षा, डिजिटल सेवाएं और खुशहाल समाज तैयार करना है.
कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार ने कई बड़ी कंपनियों और संस्थानों के साथ कुल 14 महत्वपूर्ण एमओयू (MoUs) पर हस्ताक्षर किए. इनमें जिंदल ग्रुप, वरुण बेवरेजेस, टाटा समूह, गूगल, ईज माय ट्रिप, जनरल स्टील, पावर न्यूक्लियर समेत कई प्रमुख संस्थाएं शामिल रहीं. इन समझौतों का उद्देश्य उद्योग, पर्यटन, डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार को नई गति देना है. इसके अलावा विभिन्न विभागों की नई ड्राफ्ट नीतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उसके खनिज संसाधन नहीं हैं. राज्य के युवाओं में अपार प्रतिभा है और अब जरूरत इस प्रतिभा को सही दिशा देने की है. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि झारखंड रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप का नया केंद्र बने. इसके लिए राज्य में शोध संस्थानों, तकनीकी संस्थाओं और इनोवेशन सेंटर का स्वागत किया जाएगा.
सीएम ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण बात कही कि सरकार अब केवल छोटी अवधि की योजनाओं पर नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप पर काम कर रही है. उनका कहना था कि निवेश तभी सफल माना जाएगा, जब उसका फायदा सीधे लोगों तक पहुंचे. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन परियोजनाओं पर समझौते हुए हैं, उन्हें तय समय सीमा के भीतर जमीन पर उतारा जाए. सिर्फ एमओयू पर हस्ताक्षर करना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनका सफल क्रियान्वयन सरकार की प्राथमिकता होगी.
उन्होंने कहा कि आज हुए एमओयू केवल कागजों पर लिखे समझौते नहीं हैं. ये झारखंड के भविष्य की नई संभावनाओं का रास्ता खोलने वाले कदम हैं. सरकार चाहती है कि हर निवेश रोजगार पैदा करे, स्थानीय लोगों को अवसर मिले और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो.
मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज के विकास को भी इस विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. उन्होंने जियाडा (JIADA) की उस व्यवस्था का जिक्र किया, जिसमें आदिवासी समूहों को 25 प्रतिशत रियायत का प्रावधान है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस व्यवस्था की समीक्षा कर इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावनाएं तलाशनी चाहिए. उनका मानना है कि राज्य के विकास की असली तस्वीर तभी बदलेगी, जब आदिवासी समाज को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ा जाएगा.
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि पहले झारखंड की संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने प्रभावी तरीके से नहीं रखा जा सका. बेहतर संवाद की कमी के कारण कई अवसर हाथ से निकल गए. लेकिन अब सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है. निवेशकों, उद्योग जगत और वैश्विक संस्थाओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की रणनीति तैयार की जा रही है ताकि झारखंड में निवेश का माहौल और मजबूत हो.
कार्यक्रम के दौरान पर्यटन क्षेत्र को भी विकास का बड़ा इंजन बताया गया. सरकार का मानना है कि प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थल, झरने, जंगल और जनजातीय संस्कृति झारखंड की सबसे बड़ी ताकत हैं. यदि इन्हें आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रचार के साथ जोड़ा जाए तो राज्य पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकता है.
डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी विशेष जोर दिया गया. सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और लोगों के लिए आसान बनाया जाए. इसके लिए नई तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएगा.
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी उद्योगपतियों, तकनीकी विशेषज्ञों, केंद्रीय मंत्रियों, निवेशकों और नीति निर्माताओं का आभार व्यक्त किया. उन्होंने 'जोहार' के साथ सभी से झारखंड के विकास की इस यात्रा में सहभागी बनने की अपील की. Vision 2050 के इस मंच से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा से नहीं, बल्कि ज्ञान, तकनीक, नवाचार और समावेशी विकास से होगी. यही नया रोडमैप राज्य को उद्योग के साथ-साथ खुशहाली की ओर भी ले जाने की तैयारी है.

