रांची (RANCHI): झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स की लगभग 7 एकड़ अधिग्रहित सरकारी जमीन को फर्जीवाड़े के जरिए बेचने के मामले में फिर एक नया मोड सामने आया है जहां मुख्य आरोपी राजकिशोर बड़ाइक को कानून का बड़ा झटका लगा है. रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए उसे बेल देने से साफ इनकार कर दिया है. कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब आरोपी को जेल में ही रहना होगा.
गौरतलब है कि राजकिशोर बड़ाइक की जमानत अर्जी पर पिछली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. यह पूरा मामला फर्जी वंशावली और जाली दस्तावेजों के सहारे सरकारी जमीन को हड़पने और उसे ऊंचे दामों पर बेचने से जुड़ा है. झारखंड हाईकोर्ट के कड़े आदेश और निर्देश के बाद हरकत में आई ACB ने इस साल अप्रैल महीने में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था. इस दौरान मुख्य आरोपी राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक समेत 4 प्रमुख जालसाजों को गिरफ्तार किया गया था.
आपको बता दें, ACB की अब तक की तफ्तीश में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भू-माफियाओं ने साल 1964-65 में रिम्स के लिए अधिग्रहित की गई कीमती जमीन को फर्जी कागजातों के दम पर अपनी निजी संपत्ति घोषित कर दिया था. इसके बाद इन माफियाओं ने बिल्डरों के साथ साठगांठ कर इस जमीन को करीब 31 लाख रुपये में बेच डाला. इस महाघोटाले को लेकर ACB ने कांड संख्या 1/2026 दर्ज की है. इस मामले में न सिर्फ भू-माफिया बल्कि सरकारी तंत्र की मिलीभगत भी सामने आई है, जिसके तहत 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी ACB के रडार पर हैं. बताते चले, गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में फर्जी वंशावली तैयार करने वाले चेतन कुमार और राजेश कुमार झा भी शामिल हैं.