रांची(RANCHI): झारखण्ड के निजी अस्पताल में बढ़ते हिंसा के मामले में Indian Medical Association (IMA) – Hospital Board of India की झारखंड शाखा ने चिंता जताई है. संगठन ने इसे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए सरकार से अस्पतालों की सुरक्षा मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की है.
शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में IMA Hospital Board ने हाल ही में रांची के राज हॉस्पिटल में हुई हिंसक घटना की कड़ी निंदा की. IMA Hospital board ने कहा कि गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज का करीब 40 दिनों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने लगातार इलाज किया.तमाम प्रयासों के बावजूद मरीज की जान नहीं बच सकी.इसके बाद अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ और चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जिससे अस्पताल में भर्ती अन्य गंभीर मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ा.
IMA ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है.कुछ महीने पहले रांची के सैमफोर्ड हॉस्पिटल में भी डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटना सामने आई थी.लगातार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि राज्य में अस्पतालों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी और कठोर व्यवस्था लागू करना अब बेहद जरूरी हो गया है.
संगठन का कहना है कि चिकित्सा विज्ञान में हर मरीज को बचाने का पूरा प्रयास किया जाता है, लेकिन हर उपचार का परिणाम चिकित्सकों के नियंत्रण में नहीं होता.किसी भी चिकित्सकीय विवाद या असहमति का समाधान कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, न कि हिंसा, धमकी या तोड़फोड़ के जरिएm
IMA Hospital Board of India ने राज्य सरकार से अस्पतालों में हिंसा रोकने के लिए प्रभावी कानूनों का सख्ती से पालन कराने, दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने तथा अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है.संस्था का कहना है कि डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी तभी निर्भय होकर अपनी सेवाएं दे सकेंगे जब उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मिलेगी.
संगठन ने मीडिया से भी अपील की है कि किसी भी संवेदनशील चिकित्सकीय मामले की रिपोर्टिंग से पहले सभी पक्षों का तथ्यात्मक पक्ष अवश्य लिया जाए, ताकि समाज तक संतुलित और प्रमाणिक जानकारी पहुंच सके.
IMA Hospital Board of India के झारखंड राज्य समन्वयक डॉ. अभिषेक रामाधीन ने कहा कि अस्पताल जीवन बचाने के केंद्र हैं, संघर्ष के नहीं.डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास बनाए रखना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हर नागरिक के सुरक्षित उपचार के अधिकार की रक्षा करना है.

