मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की समीक्षा की, किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर दिया जोर

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की समीक्षा की, किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर दिया जोर

राँची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की. बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रगति और चालू वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सरकार की सभी किसान हितैषी योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ पहुंचना चाहिए.

बैठक में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी उपस्थित रहीं.

किसानों तक समय पर पहुंचे योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं. उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड, पशुधन विकास योजना, बीज एवं खाद वितरण, कोल्ड स्टोरेज, लैम्प्स, पैक्स, व्यापार मंडल, सहकारी समितियों तथा जल स्रोतों के पुनरुद्धार जैसी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित कृषि और किसानों का सर्वांगीण विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता है तथा खेती और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.

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दलहन, मिलेट और तकनीक आधारित खेती को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने राज्य में दलहन एवं मिलेट की खेती को बढ़ावा देने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि झारखंड में मिलेट उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं. सभी जिलों में कम से कम एक गांव या पंचायत को चिन्हित कर मॉडल कृषक पाठशाला संचालित की जाए तथा किसानों को आधुनिक और तकनीक आधारित खेती का प्रशिक्षण दिया जाए.

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में राज्य में 57 किसान पाठशालाएं संचालित हैं. मुख्यमंत्री ने इनके बेहतर संचालन के लिए कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के सहयोग से नवीनतम कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने को कहा.

सभी प्रमंडलों में लगेगा कृषि व्यापार मेला

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि रांची में आयोजित राज्यस्तरीय कृषि व्यापार मेले की तर्ज पर सभी प्रमंडलों में चरणबद्ध तरीके से कृषि व्यापार मेले आयोजित किए जाएं. साथ ही कृषि योग्य परती एवं बंजर भूमि की पहचान कर वहां कृषि गतिविधियां शुरू करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा.

किसान समृद्धि योजना और सोलर पंप वितरण में तेजी लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने किसान समृद्धि योजना के तहत अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा आधारित पंपसेट उपलब्ध कराकर किसानों की सिंचाई लागत कम की जा सकती है और बिजली पर निर्भरता भी घटेगी.

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान समृद्धि योजना और प्रधानमंत्री कुसुम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरेडा के साथ समन्वय स्थापित कर बेहतर फ्रेमवर्क तैयार किया जाए.

कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति

मुख्यमंत्री ने राज्य में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि एवं पशुपालन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए. उन्होंने विशेष रूप से पलामू प्रमंडल और अन्य कम वर्षा वाले जिलों में किसानों को धान के बजाय दलहन, मिलेट, जैविक खेती, व्यावसायिक खेती तथा जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहा.

मशरूम, मधुमक्खी पालन और महिला किसानों पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने मशरूम उत्पादन से जुड़े किसानों की मैपिंग करने तथा प्रत्येक जिले में मशरूम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए. उन्होंने महिला किसान उत्पादक समूहों के माध्यम से मशरूम उत्पादन और स्पॉन निर्माण का प्रशिक्षण देने पर भी बल दिया.

इसके अलावा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने तथा मधुमक्खी पालकों को सुरक्षा किट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए.

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मॉडल कृषि गांव विकसित करने की योजना

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में एक गांव अथवा पंचायत को कृषि मॉडल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा. इसके लिए मिट्टी परीक्षण, सिंचाई, किसानों की जरूरतों और स्थानीय संसाधनों के आधार पर पायलट परियोजना तैयार करने तथा स्थानीय युवाओं और किसानों को इससे जोड़ने के निर्देश दिए.

उन्होंने यह भी कहा कि एक ही किसान को बार-बार योजनाओं का लाभ देने के बजाय पात्र लाभार्थियों का दायरा बढ़ाया जाए ताकि अधिकाधिक किसान सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें.

पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन, सूकर पालन, कुक्कुट पालन और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए.

उन्होंने पशुओं के नियमित टीकाकरण, आधुनिक पशु चिकित्सालयों की उपलब्धता और बेहतर पशु चिकित्सा सेवाओं पर भी जोर दिया.

माइनिंग क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां कम होने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने वहां मुर्गी पालन और बकरी पालन आधारित व्यवसाय मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए. साथ ही राज्य में ब्रिडिंग फार्मों की स्थिति सुधारने और केंद्रीय कारागारों में डेयरी फार्म विकसित करने की अवधारणा पर भी काम करने को कहा.

एग्रीकल्चर इको सिस्टम और कॉमर्शियल मॉडल विकसित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुपालकों का डेटाबेस तैयार कर उन्हें मिल्क फेडरेशन से जोड़ने तथा प्रमंडल स्तर पर पशु मेलों के आयोजन का कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए.

उन्होंने राज्य में कृषि एवं पशुपालन आधारित व्यावसायिक मॉडल विकसित करने और किसानों को बड़े पैमाने पर पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया.

तकनीक आधारित कृषि और प्रभावी मॉनिटरिंग पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को मौसम आधारित सलाह, आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, फसल विविधीकरण और बाजार से बेहतर जुड़ाव उपलब्ध कराने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए. उन्होंने जिला और प्रखंड स्तर पर सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए.

लैम्प्स और पैक्स को अधिक सक्रिय बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने सहकारी समितियों को किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार बताते हुए लैम्प्स एवं पैक्स को अधिक सक्रिय बनाने, कृषि उत्पादों की खरीद प्रणाली मजबूत करने, किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने तथा सहकारी संस्थाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कम्प्यूटरीकरण, बैंकिंग सेवाओं और बीज वितरण नेटवर्क को भी मजबूत करने पर जोर दिया.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किसानों से की बातचीत

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गढ़वा जिले के भवनाथपुर स्थित किसान पाठशाला का निरीक्षण किया और वहां के परियोजना प्रबंधक डॉ. प्रदीप कुमार सैनी से प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी ली.

उन्होंने दुमका जिले के किसान सुरेश मरांडी से बातचीत कर उनकी खेती और सरकारी योजनाओं से मिले लाभ की जानकारी प्राप्त की तथा कम वर्षा वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी. इसके अलावा जामताड़ा के जिला कृषि पदाधिकारी से काजू की खेती पर विस्तृत जानकारी लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए.

बैठक में रहे उपस्थित

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, निबंधक सहयोग समितियां शशि रंजन, निदेशक पशुपालन रॉबिन टोप्पो, निदेशक कृषि विद्यानंद शर्मा पंकज, संयुक्त सचिव रविशंकर विद्यार्थी, निदेशक समेती विकास कुमार, निदेशक मत्स्य अमरेंद्र कुमार, अपर सचिव अल्बर्ट बिलुंग, निदेशक गव्य संजीव रंजन, निदेशक उद्यान प्रवीण केरकेट्टा सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.