झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का भव्य आगाज़ आज, मोराबादी मैदान में दिखेगी जनजातीय संस्कृति की समृद्ध झलक

झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का भव्य आगाज़ आज, मोराबादी मैदान में दिखेगी जनजातीय संस्कृति की समृद्ध झलक

रांची (RANCHI): झारखंड की जनजातीय पहचान, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से राजधानी रांची के मोराबादी मैदान में आज, 9 अगस्त से दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का भव्य आगाज होने जा रहा है. यह राज्यस्तरीय महोत्सव 9 और 10 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव को झारखंड की आदिवासी कला, संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. महोत्सव के दौरान झारखंड की विविध जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा. आयोजन का औपचारिक उद्घाटन रविवार को दोपहर 1:30 बजे किया जाएगा.

उद्घाटन समारोह को लेकर मोराबादी मैदान में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. इस भव्य कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे. इसके अलावा राज्य सरकार के मंत्रीगण, सांसद, विधायक और अन्य गणमान्य अतिथियों की भी समारोह में उपस्थिति रहेगी. उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान झारखंड की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की भव्य प्रस्तुति देखने को मिलेगी. महोत्सव के आयोजन को लेकर राजधानी में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है. आयोजन स्थल को आकर्षक तरीके से सजाया गया है, जहां राज्य की सांस्कृतिक विविधता को अलग-अलग माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा.

झारखंड आदिवासी महोत्सव का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समुदायों की कला, परंपरा, हस्तशिल्प, लोक संगीत, नृत्य और जीवनशैली को व्यापक पहचान दिलाना भी इसका अहम लक्ष्य है. महोत्सव के माध्यम से स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा. साथ ही युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और विरासत से जोड़ने का प्रयास भी किया जाएगा. सरकार की इस पहल के जरिए झारखंड की जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है. दो दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव राज्य की सांस्कृतिक विविधता, परंपराओं और जनजातीय गौरव का जीवंत प्रदर्शन करेगा.