रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर राज्य में लगातार उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की. इस दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार भी मौजूद रहे. बैठक में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों, अभ्यर्थियों की चिंताओं और सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से चर्चा हुई.
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को हाल के दिनों में JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों, भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आरोपों तथा छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की पूरी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार पूरे मामले पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है और शिकायतों की जांच के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. साथ ही भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों का भरोसा कायम रखने के लिए भी सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है.
बैठक के दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए इनका निष्पक्ष और विश्वसनीय होना बेहद जरूरी है. यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता की आशंका सामने आती है, तो उसका समय पर समाधान किया जाना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास बना रहे.
राज्यपाल ने यह भी कहा कि JPSC और JSSC जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि परीक्षाओं और नियुक्तियों की प्रक्रिया ऐसी हो, जिस पर किसी प्रकार का संदेह न रहे और आयोगों की साख मजबूत बनी रहे.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी. सरकार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगी और यदि किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विवादों का समाधान करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे भविष्य में भर्ती परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं पर किसी प्रकार का प्रश्नचिह्न न लगे. सरकार चाहती है कि योग्य अभ्यर्थियों को पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से अवसर मिले तथा युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर भरोसा और मजबूत हो.

