झारखंड में तय सीमा से ज्यादा बिजली ली तो जेब होगी ढीली, सख्त होंगे पावर नियम, 20% अतिरिक्त जुर्माने का लगा प्रावधान

झारखंड में बिजली की तय सीमा से ज्यादा खपत या उत्पादन करने वाली इकाइयों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है. नए ड्राफ्ट नियमों में डेविएशन चार्ज, 20% अतिरिक्त जुर्माना और देरी से भुगतान पर सरचार्ज का प्रावधान किया गया है.

झारखंड में तय सीमा से ज्यादा बिजली ली तो जेब होगी ढीली, सख्त होंगे पावर नियम, 20% अतिरिक्त जुर्माने का लगा प्रावधान

रांची (RANCHI): झारखंड के पावर सेक्टर में बिजली की तय मात्रा से ज्यादा खपत या उत्पादन करने वाली इकाइयों पर अब आर्थिक कार्रवाई की तैयारी है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने ग्रिड संचालन में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ड्राफ्ट झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (इंट्रा-स्टेट डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म एंड रिलेटेड मैटर्स) रेगुलेशंस, 2026 तैयार किया है. प्रस्तावित नियमों का मकसद बिजली के शेड्यूल और वास्तविक उत्पादन या खपत के बीच होने वाले अंतर यानी डेविएशन को नियंत्रित करना है.

नए नियम लागू होने के बाद तय शेड्यूल से ज्यादा बिजली लेने या ग्रिड में निर्धारित मात्रा से अधिक बिजली डालने पर संबंधित इकाई को डेविएशन चार्ज के साथ अतिरिक्त पेनाल्टी भी देनी पड़ सकती है. इसका दायरा ओपन एक्सेस के जरिए राज्य की ट्रांसमिशन या डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों और विक्रेताओं के साथ-साथ बड़े जनरेटर, कैप्टिव पावर प्लांट और वितरण लाइसेंसधारियों तक होगा.

प्रस्तावित व्यवस्था में एक दिन की शेड्यूलिंग को 15-15 मिनट के 96 टाइम ब्लॉक में बांटा जाएगा. यानी रात 12 बजे से अगले 24 घंटे तक बिजली के उत्पादन और खपत की निगरानी हर 15 मिनट पर होगी. इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस इकाई ने निर्धारित शेड्यूल से कितना अधिक या कम बिजली का इस्तेमाल किया या ग्रिड में कितनी बिजली डाली. प्रस्तावित नियमों में लगातार एक ही दिशा में डेविएशन करने पर भी रोक लगाने की व्यवस्था है. यदि कोई इकाई लगातार एक तरफ ही विचलन करती रहती है और निर्धारित समय के भीतर डेविएशन का साइन नहीं बदलती, तो उस पर दैनिक डेविएशन शुल्क के ऊपर 20 फीसदी अतिरिक्त चार्ज लगाया जा सकता है.

10 मेगावाट से बड़े जनरेटर भी दायरे में
नए ड्राफ्ट में 10 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले जनरेटर, ओपन एक्सेस उपभोक्ता, कैप्टिव पावर प्लांट और वितरण लाइसेंसधारियों के लिए डेविएशन से जुड़े नियम तय किए गए हैं. सामान्य बिजली उत्पादकों के लिए निर्धारित वॉल्यूम लिमिट के भीतर विचलन की अनुमति होगी. निर्धारित सीमा से अधिक उत्पादन या कम उत्पादन होने पर लागू नियमों के अनुसार अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है. खरीदारों के लिए भी नियम सख्त होंगे. यदि कोई इकाई तय शेड्यूल से ज्यादा बिजली खींचती है, तो उसे सामान्य दर की तुलना में काफी अधिक भुगतान करना पड़ सकता है. वहीं निर्धारित परिस्थितियों में शेड्यूल से कम बिजली लेने पर प्रोत्साहन या रिफंड का प्रावधान भी हो सकता है.

डेविएशन चार्ज के प्रबंधन के लिए स्टेट डेविएशन पूल अकाउंट बनाया जाएगा. इसका संचालन झारखंड स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर यानी SLDC करेगा. डेविएशन चार्ज और लेट पेमेंट सरचार्ज से मिलने वाली राशि इसी पूल में जमा होगी. इसका उद्देश्य बिजली के अंतर-समायोजन और ग्रिड संचालन को व्यवस्थित करना है.

SLDC की ओर से जारी डेविएशन चार्ज स्टेटमेंट का भुगतान निर्धारित अवधि में करना अनिवार्य होगा. भुगतान में देरी होने पर प्रतिदिन 0.04 फीसदी की दर से लेट पेमेंट सरचार्ज लगाया जाएगा. जिन इकाइयों ने पिछले वित्त वर्ष में समय पर भुगतान नहीं किया है, उनके लिए औसत साप्ताहिक देयता के 110 फीसदी के बराबर लेटर ऑफ क्रेडिट की व्यवस्था करने का प्रावधान रखा गया है. डिफॉल्ट की स्थिति में इस वित्तीय सुरक्षा का इस्तेमाल किया जा सकता है. जानबूझकर गलत शेड्यूल या डेटा देकर अनुचित वित्तीय लाभ लेने की कोशिश साबित होने पर आयोग अतिरिक्त कार्रवाई कर सकता है. इसमें डेविएशन से मिलने वाली राशि को रद्द करना, अतिरिक्त जुर्माना लगाना या राशि वापस लेने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं.

प्राकृतिक आपदा, ग्रिड डिस्टर्बेंस या फोर्स मेजर जैसी परिस्थितियों में प्रभावित टाइम ब्लॉक के लिए डेविएशन चार्ज में राहत का प्रावधान भी रखा गया है. ऐसी स्थिति में वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शेड्यूलिंग का आकलन किया जाएगा. इसके अलावा इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन लॉस को निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत बांटने की व्यवस्था होगी. SLDC को मासिक और वार्षिक औसत ट्रांसमिशन लॉस का विवरण सार्वजनिक करना होगा. प्रस्तावित नियमों के जरिए आयोग का लक्ष्य राज्य में बिजली के उत्पादन, खरीद, खपत और ग्रिड संचालन को अधिक अनुशासित बनाना है. इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने और बिजली बाजार में पारदर्शिता लाने में मदद मिलने की उम्मीद है.