जिस मंत्रालय में कल तक थे कर्मचारी, आज वहीं एंट्री पर सवाल! JSSC-CGL अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा
रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर JSSC-CGL से नियुक्त अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द होने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया. मंत्रालय में प्रवेश नहीं मिलने से नाराज युवाओं ने सरकार से अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की.
रांची (RANCHI): रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर मंगलवार को JSSC-CGL परीक्षा पास कर नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों को मंत्रालय में प्रवेश नहीं दिया गया. जिन युवाओं ने कुछ समय पहले इसी सचिवालय में सरकारी कर्मचारी के तौर पर काम शुरू किया था, वही अब अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं. JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद इन अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है.
मंगलवार को बड़ी संख्या में JSSC-CGL से चयनित अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर पहुंचे. उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद उन्हें नियुक्ति मिली और वे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे. लेकिन परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले ने उनके सामने अचानक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि कई युवाओं ने इस नौकरी के लिए अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं. कुछ अभ्यर्थी केंद्र सरकार में नौकरी कर रहे थे, जबकि कुछ दूसरे राज्यों में कार्यरत थे. झारखंड में सरकारी सेवा करने की उम्मीद में उन्होंने पहले की नौकरी छोड़कर यहां योगदान दिया था. एक प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि कुछ दिन पहले तक वे इसी मंत्रालय की इमारत में बैठकर सरकारी काम कर रहे थे. उन्हें लगा था कि अब उनका करियर सुरक्षित हो गया है. लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद वही कर्मचारी खुद को मंत्रालय के बाहर खड़ा पा रहे हैं.
अभ्यर्थियों ने सरकार की कार्रवाई पर उठाया सवाल
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का आरोप है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जांच संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ होनी चाहिए थी. उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया में अपनी मेहनत और समय लगाने वाले अभ्यर्थियों को इसकी सजा क्यों दी जा रही है. अभ्यर्थियों का सवाल है कि अगर किसी एजेंसी या व्यवस्था में खामी थी, तो उसका असर उन उम्मीदवारों पर क्यों पड़े जिन्होंने परीक्षा में शामिल होकर चयन प्रक्रिया पूरी की और नियुक्ति प्राप्त की? उनका कहना है कि सरकार को कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले चयनित कर्मचारियों की स्थिति पर भी विचार करना चाहिए था. अचानक नौकरी पर संकट आने से कई परिवारों के सामने आर्थिक और सामाजिक परेशानी खड़ी हो गई है.
सीधी बातचीत की मांग
प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार के वरिष्ठ अधिकारी या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि उनके साथ सीधे बातचीत करें. अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार उन्हें स्पष्ट रूप से बताए कि परीक्षा रद्द होने के बाद उनकी नियुक्ति का क्या होगा और उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे. अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन उनकी बात सुनी जानी चाहिए. उनका विरोध इसी मांग को लेकर है कि उनकी वर्षों की मेहनत और चयन प्रक्रिया को एक झटके में खत्म न किया जाए.
JSSC-CGL पास अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप हैं तो जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन जिन उम्मीदवारों ने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की, उनके साथ न्याय होना चाहिए. फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी सरकार से अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब मांग रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी स्थिति साफ नहीं होती और सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन नवनियुक्त कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और उनकी नौकरी को लेकर आगे क्या रास्ता निकाला जाता है.