बीच में ही छूट गई पढ़ाई तो ना हो परेशान, अब 3 से 18 साल तक के बच्चों का सरकार दुबारा कराएगी नामांकन
झारखंड में अब कोई बच्चा स्कूल से दूर न रहे, इसके लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है. राज्य में ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जिन्होंने अब तक स्कूल में दाखिला नहीं लिया है या किसी वजह से बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है. इसके लिए बस्तीवार मैपिंग के बाद घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा.
रांची(RANCHI): झारखंड में अब कोई बच्चा स्कूल से दूर न रहे, इसके लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है. राज्य में ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जिन्होंने अब तक स्कूल में दाखिला नहीं लिया है या किसी वजह से बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है. इसके लिए बस्तीवार मैपिंग के बाद घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा. इस अभियान में 3 से 18 साल तक के बच्चों की जानकारी जुटाई जाएगी.
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने इसकी तैयारी तेज कर दी है. सर्वे से जुड़ी प्रक्रिया को समझाने के लिए राज्यस्तरीय प्रशिक्षण भी दिया गया है. इसमें शिक्षकों को बताया गया कि बच्चों की जानकारी कैसे जुटानी है और उसे डाहर पोर्टल पर कैसे दर्ज करना है.
9 नवंबर तक मैपिंग, फिर शुरू होगा सर्वे
अभियान के पहले चरण में 9 नवंबर 2026 तक बस्तियों की मैपिंग पूरी की जाएगी. इसके बाद 10 नवंबर 2026 से 10 जनवरी 2027 तक घर-घर सर्वेक्षण चलेगा. सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक परिवारों से संपर्क कर बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे. इस काम में प्रखंड और संकुल संसाधन केंद्र के कर्मियों की भी मदद ली जाएगी. सर्वे के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि कौन बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है और किसने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है. पहले से मौजूद जानकारी का भी सत्यापन होगा, ताकि कोई बच्चा सूची से छूट न जाए.
ड्रॉपआउट मुक्त बस्ती बनाने का लक्ष्य
इस अभियान का मकसद सिर्फ बच्चों की गिनती करना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा पढ़ाई से जोड़ना भी है. विभाग ने जीरो ड्रॉपआउट हैबिटेशन यानी ड्रॉपआउट मुक्त बस्ती बनाने का लक्ष्य रखा है. इसके तहत 6 से 18 साल तक के सभी बच्चों का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा. सर्वे से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल शिक्षा से जुड़ी योजनाओं और वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना व बजट तैयार करने में भी किया जाएगा. इससे बच्चों की जरूरत के हिसाब से योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी.