बिग स्टोरी : करोड़ों का मेंटेनेंस, फिर भी घंटों अंधेरा! 72 घंटे की बारिश ने बेनकाब की झारखंड की बिजली व्यवस्था

झारखंड में बिजली व्यवस्था चौपट हो गई. जैसे जैसे शहर हाई टेक हो रहे है. वैसे वैसे बिजली व्यवस्था पुराने जमाने में पहुँच रही है. हाल के दिनों में बिजली का हाल देख कर लोग 90 के 2000 के समय के झारखंड को याद कर रहे है.

बिग स्टोरी : करोड़ों का मेंटेनेंस, फिर भी घंटों अंधेरा! 72 घंटे की बारिश ने बेनकाब की झारखंड की बिजली व्यवस्था

रांची: झारखंड में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के बीच बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. मूसलाधार बारिश शुरू होते ही राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में बिजली ट्रिप होने, तार टूटने, ट्रांसफॉर्मर में खराबी और घंटों बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं. बिजली कटौती का असर पेयजल आपूर्ति, कारोबार, पढ़ाई और आम जनजीवन पर भी पड़ रहा है. 

राजधानी रांची के हरमू, अपर बाजार, अरगोड़ा, कटहल मोड़, चुटिया और कोकर समेत कई इलाकों में उपभोक्ताओं ने लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की शिकायत की है. कई परिवारों के सामने पानी की समस्या भी खड़ी हो गई, क्योंकि बिजली नहीं रहने से मोटर नहीं चल सकी. 

उपभोक्ताओं का कहना है कि हर महीने समय पर बिजली बिल का भुगतान करने के बावजूद बारिश के दौरान उन्हें घंटों बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है.  वहीं, बिजली विभाग की ओर से फॉल्ट दूर करने में लगने वाले समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. 

करोड़ों की अंडरग्राउंड केबलिंग, फिर भी बारिश में संकट

बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में अंडरग्राउंड केबलिंग समेत कई योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं.  JBVNL की JSBAY Urban योजना के तहत रांची समेत छह शहरों में बिजली नेटवर्क को मजबूत करने का काम किया गया.  योजना की स्वीकृत लागत ₹1,324.56 करोड़ थी, जबकि निष्पादित कार्य की कीमत करोड़ों का मेंटेनेंस, फिर भी घंटों अंधेरा! 72 घंटे की बारिश ने बेनकाब की झारखंड की बिजली व्यवस्था करोड़ दर्ज की गई है. इस योजना में रांची, जमशेदपुर/पूर्वी सिंहभूम, धनबाद-बोकारो, देवघर-गोड्डा, रामगढ़ और बासुकीनाथ को शामिल किया गया था. 

JBVNL के अनुसार योजना के तहत 33 KV की 533.60 CKM, 11 KV की 702.24 CKM और LT की 63.74 CKM अंडरग्राउंड केबलिंग का काम किया गया. 

इसके बावजूद बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति में बार-बार व्यवधान सवाल खड़े करता है कि इन परियोजनाओं का असर ग्राउंड पर कितना दिखाई दे रहा है. 

ऊर्जा क्षेत्र के लिए ₹7,379 करोड़ का प्रावधान  

झारखंड के 2026-27 के बजट में Energy सेक्टर के लिए ₹7,379 करोड़ का प्रावधान किया गया है.  इसमें बिजली उपभोक्ताओं को दी जाने वाली ₹5,405 करोड़ की पावर टैरिफ सब्सिडी भी शामिल है. 

वहीं, JBVNL के 2026 के टैरिफ दस्तावेज के अनुसार, 2025-26 में Repair & Maintenance पर ₹468.84 करोड़ और 2026-27 के लिए ₹524.16 करोड़ के खर्च का दावा दर्ज है. 

ऐसे में बारिश के दौरान सामने आ रही बिजली कटौती के बीच सवाल उठ रहा है कि रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बिजली व्यवस्था मौसम के दबाव में क्यों लड़खड़ा रही है?

बारिश से पहले मेंटेनेंस की तैयारी पर सवाल

बारिश के दौरान बिजली फॉल्ट होना पूरी तरह असामान्य नहीं है, लेकिन लगातार और लंबे समय तक बिजली बाधित रहने से व्यवस्था की तैयारी पर सवाल जरूर उठते हैं.  ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बारिश से पहले कितने फीडर, ट्रांसफॉर्मर और बिजली लाइनों का प्रिवेंटिव मेंटेनेंस किया गया था और फॉल्ट आने के बाद बिजली बहाली में औसतन कितना समय लग रहा है। बिजली व्यवस्था का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। बिजली बाधित होने से पेयजल आपूर्ति, छोटे कारोबार, दुकानदारों, छात्रों और घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है.