एक तरफा प्यार में कांग्रेस ने तोड़ा JMM का दिल, अब राज्यसभा चुनाव से झामुमो लेगी इंतकाम

राज्यसभा चुनाव से पहले JMM ने दोनों सीटों पर अपना दावा ठोक दिया है. केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि गठबंधन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा और पार्टी चाहती है कि दोनों उम्मीदवार झामुमो के हों.

एक तरफा प्यार में कांग्रेस ने तोड़ा JMM का दिल, अब राज्यसभा चुनाव से झामुमो लेगी इंतकाम

रांची (RANCHI): झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने गठबंधन की रणनीति और पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है और चुनाव तभी होगा, जब दो से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे. 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि महागठबंधन में शामिल JMM, कांग्रेस, राजद और वामदलों के कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त हैं. उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी इन्हीं दलों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में लड़े थे और गठबंधन को जनता का स्पष्ट समर्थन मिला था. ऐसे में राज्यसभा चुनाव भी हेमंत सोरेन के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. 

उन्होंने बताया कि JMM ने पार्टी स्तर पर हेमंत सोरेन को अधिकृत किया है और पार्टी की स्पष्ट मांग है कि दोनों राज्यसभा सीटों पर JMM के उम्मीदवार उतारे जाएं. उनका कहना था कि झामुमो ने विपरीत परिस्थितियों में भी गठबंधन धर्म का पालन करते हुए लगातार दो बड़े चुनाव लड़े हैं और संगठन ने हमेशा सहयोगी दलों का सम्मान किया है. 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने बिहार विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां JMM को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया था, इसके बावजूद पार्टी ने गठबंधन की भावना को बनाए रखा. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार में राजद को मंत्री पद देकर सम्मानजनक भागीदारी दी गई है. साथ ही उन्होंने कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों से भी अपेक्षा जताई कि वे JMM कार्यकर्ताओं और पार्टी की भूमिका का सम्मान करें. 

कांग्रेस की ओर से संभावित उम्मीदवार के नाम की चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल था या वह उम्मीदवार उतारना चाहती थी, तो पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सहयोगियों से चर्चा करनी चाहिए थी. बिना आपसी सहमति के किसी नाम की घोषणा करना गठबंधन के भीतर असहज स्थिति पैदा कर सकता है. 

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन पूरी मजबूती के साथ जनता के साथ खड़ा है और वर्ष 2029 तक यह एकजुट बना रहेगा. विपक्ष पर निशाना साधते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि "16 वाले और 21 वाले भी बेचैन हैं", लेकिन महागठबंधन पूरी तरह मजबूत और संगठित है.

रिपोर्ट : सौम्या शुक्ला