रांची (RANCHI): झारखंड में अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने और उत्पाद विभाग को तकनीक व मानव संसाधन से मजबूत बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. साथ ही विभाग की रिक्तियों को जल्द भरने, नई मदिरा विनिर्माण नीति तैयार करने और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के निर्देश भी दिए.

झारखंड मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों और 2026-27 की कार्ययोजना की विस्तार से समीक्षा की. उन्होंने कहा कि अवैध शराब का कारोबार केवल सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बनता है. इसलिए इस अवैध नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई हर हाल में सुनिश्चित की जाए.

बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने निर्धारित 3,885.11 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 4,013.53 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया. वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया है. जुलाई 2026 के मध्य तक विभाग 1,376 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा चुका है, जो वार्षिक लक्ष्य का 30.57 प्रतिशत है. मुख्यमंत्री ने विभागीय कार्यों में आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया. उन्होंने निर्देश दिया कि मदिरा परिवहन करने वाले सभी वाहनों में GPS ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक (DG Lock) की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि वाहनों की रियल-टाइम निगरानी हो सके और परिवहन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बने. साथ ही राज्य में स्पिरिट की वर्तमान और भविष्य की मांग का अध्ययन कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा.

बैठक में मुख्यमंत्री ने विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके. अधिकारियों ने जानकारी दी कि 583 उत्पाद सिपाहियों की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों में उत्पाद विभाग के गोदाम निर्माण कार्यों में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने का भी निर्देश दिया. उनका कहना था कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए नई मदिरा विनिर्माण नीति और औद्योगिक अल्कोहल विनियमन नीति तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने अधिकारियों से लोकप्रिय ब्रांडों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लेबल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को भी सरल और पारदर्शी बनाने को कहा. बैठक में उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग की कार्यप्रणाली को पारदर्शी, तकनीक आधारित और जनहित केंद्रित बनाकर राज्य में राजस्व वृद्धि के साथ-साथ अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा.

