SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की अपील, खबरों से पहले तथ्यों का सत्यापन जरूरी

SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की अपील, खबरों से पहले तथ्यों का सत्यापन जरूरी

रांची (RANCHI): झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बड़ी बात कही है. उन्होंने मीडिया संस्थानों से खबर प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों और वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में एक ही मकान संख्या के अंतर्गत अधिक मतदाताओं के नाम दर्ज होने को बूथ लेवल पदाधिकारियों की लापरवाही के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि इसकी वास्तविक वजह अलग हो सकती है. कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में नए मकानों को स्थानीय निकाय या पंचायत की ओर से अभी तक अलग मकान संख्या नहीं मिली है. वहीं, अपार्टमेंट और फ्लैटों में पते व क्रम संख्या के मानकीकरण की जरूरत वाले मामले भी सामने आते हैं. ऐसे में एक ही मकान संख्या से कई मतदाताओं का जुड़ा होना जरूरी नहीं कि वे सभी एक ही घर या परिवार के सदस्य हों.

के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि 5 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में मकान संख्या को लेकर कोई नया आंकड़ा जारी नहीं किया गया है और पहले से दर्ज मकान संख्या को ही कैरी फॉरवर्ड किया गया है. जहां पंचायत या नगर निकाय की ओर से मकान संख्या आवंटित नहीं है, वहां दावा-आपत्ति चरण के दौरान बीएलओ द्वारा व्यवस्थित तरीके से नोशनल हाउस नंबर आवंटित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि SIR के दौरान एक परिवार के सभी मतदाताओं को यथासंभव एक ही मतदान केंद्र पर सूचीबद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है. दावा-आपत्ति चरण में “होम टू रोल” स्टीकर के माध्यम से नागरिकों से भी यह जांच करने की अपील की जाएगी कि उनके परिवार के सभी पात्र सदस्य मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज हैं या नहीं. बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म उपलब्ध कराने, जमा करने, मतदाताओं की मैपिंग और सूची को अपडेट करने का काम लगातार किया गया है.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची अंतिम सूची नहीं है और दावा-आपत्ति अवधि का उद्देश्य ही विसंगतियों को दूर करना है. पात्र नागरिक इस दौरान आवश्यक दावा प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसके बाद सक्षम अधिकारी द्वारा नियमानुसार सत्यापन और कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने मीडिया को SIR प्रक्रिया का महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर बताते हुए अपील की कि किसी भी तकनीकी या पता संबंधी विसंगति को प्रकाशित करने से पहले संबंधित जिला निर्वाचन पदाधिकारी या निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी से तथ्य की पुष्टि जरूर की जाए. अपूर्ण या भ्रामक जानकारी से मतदाताओं में अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है और चुनाव प्रक्रिया में लगे बीएलओ का मनोबल भी प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि कार्यालय हर तथ्यात्मक शिकायत की जांच के लिए प्रतिबद्ध है. SIR का उद्देश्य पात्र भारतीय नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल करना, अपात्र या विदेशी नागरिकों के नाम को रोकना और सूची को शुद्ध, अद्यतन एवं त्रुटिरहित बनाना है.