रांची (RANCHI): कई बार प्रतिभा और मेहनत होने के बावजूद आर्थिक मजबूरियां बच्चों के सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी दीवार बन जाती हैं. झारखंड के दूर-दराज गांवों में रहने वाले ऐसे हजारों छात्र हैं, जो आईआईटी, एम्स या देश के बड़े लॉ कॉलेजों में पढ़ने का सपना तो देखते हैं, लेकिन महंगी कोचिंग और संसाधनों की कमी उन्हें पीछे छोड़ देती है. ऐसे ही मेधावी और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए झारखंड सरकार की जैक आकांक्षा-40 योजना उम्मीद की नई रोशनी बनकर सामने आई है.
यह योजना केवल मुफ्त कोचिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि उन बच्चों को एक ऐसा मंच देती है, जहां उनकी प्रतिभा को सही दिशा और बेहतर अवसर मिलते हैं. पिछले कुछ वर्षों में आकांक्षा से निकलकर सैकड़ों छात्र देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग, मेडिकल और लॉ संस्थानों तक पहुंचे हैं. ऐसे में इस योजना ने शानदार सफलता हासिल की है, जहां 9 विद्यार्थियों ने आईआईटी में जगह बनाकर राज्य का नाम रोशन किया है. इसी कड़ी में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर आकांक्षा-40 क्या है, इसकी शुरुआत कब हुई, इसमें दाखिला कैसे मिलता है और अब तक इसका प्रदर्शन कैसा रहा है.
क्या है आकांक्षा-40 योजना?
आकांक्षा योजना की शुरुआत वर्ष 2016-17 में झारखंड सरकार द्वारा की गई थी. इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आईआईटी, एनआईटी, मेडिकल कॉलेजों और राष्ट्रीय स्तर की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराना है. रांची स्थित जिला स्कूल परिसर में इस योजना के तहत आवासीय कोचिंग सेंटर संचालित किया जाता है. यहां विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ रहने, खाने, पुस्तकें, अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन की सुविधा पूरी तरह मुफ्त दी जाती है.
कैसे होता है चयन?
आकांक्षा में प्रवेश के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है. इस परीक्षा में राज्य के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत मेधावी छात्र-छात्राएं भाग लेते हैं. परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थियों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाता है. चयनित विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग, मेडिकल और अब लॉ प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. आमतौर पर नया शैक्षणिक सत्र बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद शुरू किया जाता है.
कौन ले सकता है प्रवेश?
इस योजना का लाभ मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिलता है. आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है. चयन परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है.
लगातार बेहतर होते गए परिणाम
आकांक्षा योजना का पहला बड़ा परिणाम वर्ष 2018 में देखने को मिला, जब यहां से पढ़ाई करने वाले कई छात्रों ने आईआईटी, एनआईटी और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश हासिल किया. इसके बाद हर वर्ष विद्यार्थियों का प्रदर्शन बेहतर होता गया. कोविड महामारी के दौरान भी संस्थान ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रखी. इसके बावजूद छात्रों ने आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और देश के कई प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्राप्त किया.
क्यों खास है आकांक्षा?
आकांक्षा सिर्फ एक कोचिंग संस्थान नहीं, बल्कि उन बच्चों के सपनों को उड़ान देने वाला मंच है, जो संसाधनों के अभाव में बड़े लक्ष्य हासिल नहीं कर पाते. यहां मिलने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और पूरी तरह निशुल्क आवासीय सुविधा इसे खास बनाती है. आज यह योजना साबित कर चुकी है कि यदि प्रतिभा को सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो गांवों और गरीब परिवारों के बच्चे भी आईआईटी, एम्स और देश के शीर्ष संस्थानों तक पहुंच सकते हैं. यही वजह है कि आकांक्षा-40 झारखंड के हजारों विद्यार्थियों के लिए सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी बन चुका है.