रांची(RANCHI): जिसके जिम्मे जेल की सुरक्षा और विधि व्यवस्था की जिम्मेवारी थी उसी ने महिला कैदी के साथ गलत कर दिया. रांची जेल का यह मामला देश में सुर्खियों में है. अब हाई कोर्ट ने भी इसे स्वत संज्ञान लिया है. और DGP को तलब किया है. साथ पूरी रिपोर्ट की मांग की है. आम तौर पर माना जाता है कि किसी जुर्म के बदले कानून के तहत जेल का प्रावधान है जिससे उसे एक सिख मिले और दोबारा कोई ऐसी गलती ना करे. लेकिन जब जेल के अंदर ही महिला कैदी सुरक्षित ना रहे तो फिर सवाल बड़ा हो जाता है. आखिर जवाब कौन देगा. कौन बताएगा की जेल के अंदर एक महिला के साथ वह काम किया गया. जिसकी परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है. इस खबर की पूरी कहानी बताते है
इससे पहले यह जान लीजिए की झारखंड हाई कोर्ट ने पूरे मामले में गंभीर है.राज्य की पुलिस महानिदेशक को तलब किया है. और सुनवाई के दौरान पूरी रिपोर्ट की मांग कोर्ट ने की है.
अब पूरे मामले में सवालों के घेरे में जेल अधीक्षक और जेलर है. एक संगीन आरोप लगा है. जिसकी सच्चाई कोर्ट में सुनवाई के बाद सामने आसकती है. लेकिन फिलहाल विपक्ष इस मामले को लेकर कई सवाल खड़ा कर रहा है आखिर किसे इशारे में पूरे केस को छिपाने की कोशिश की जा रही है. पीछे की कहानी क्या है. कौन है जेलर और जेल अधीक्षक जो जेल को अय्याशी का अड्डा बना रहे है. जिन्हे किसी का खौफ नहीं है.
अब इसकी शुरुआत कैसे हुई यह जान लीजिए बीते 16 मई से हुई. जब नेता प्रतिपक्ष ने एक पत्र मुख्यमंत्री को लिखा और बताया की जेल में महिला कैदी के साथ गलत हुआ उसे गर्भवती कर दिया गया. लेकिन इस मामले को छिपाने की कोशिश शुरू कर दी गई और शाम होते होते एक रिपोर्ट जारी कर बताया गया की महिला गर्भवती नहीं है.
लेकिन इस बीच ही झालसा ने संज्ञान लिया और एक जांच टीम को जेल भेजा. बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारा पहुंच कर जांच की. महिला से पूछताछ किया जिसमें खुलासा हुआ की उसके साथ यौन शोषण किया गया है. इस जांच के बाद एक सील बंद लिफ़ाफ़े में रिपोर्ट झालसा को भेजी गई.इस बीच ही अब हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और पूरी सच्चाई को सामने आने की अब उम्मीद जागी है.