BREAKING: JSSC CGL नियुक्तियां रद्द करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, नवनियुक्त अफसरों ने दायर की याचिका
JSSC CGL नियुक्तियां रद्द किए जाने के सरकार के फैसले के खिलाफ नवनियुक्त अधिकारियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया है. रमेश उरांव समेत अन्य अधिकारियों ने याचिका दायर कर राहत की मांग की है.
रांची (RANCHI): JSSC की परीक्षाओं और JSSC CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले के खिलाफ अब मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है. सरकार के आदेश से प्रभावित नवनियुक्त अधिकारियों ने अदालत का रुख करते हुए अपनी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के फैसले पर सवाल उठाया है. इस मामले में रमेश उरांव समेत अन्य नवनियुक्त अधिकारियों की ओर से याचिका दायर की गई है.
बताया जा रहा है कि याचिका अभी झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है. हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह अदालत से किए जाने की तैयारी है. ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि हाईकोर्ट इस मामले में कब सुनवाई करता है और सरकार के फैसले पर अदालत का रुख क्या रहता है.
JSSC CGL परीक्षा के जरिए चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद नियुक्त किए गए अधिकारियों का कहना है कि सरकार के फैसले से उनकी नौकरी और भविष्य पर सीधा असर पड़ा है. इसी को लेकर प्रभावित अधिकारियों ने न्यायिक रास्ता अपनाया है. याचिका दायर करने वालों में रमेश उरांव और अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं. सरकार की ओर से JSSC की परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को लेकर लिए गए फैसले के बाद पहले से ही राज्य में राजनीतिक और छात्र आंदोलन का माहौल बना हुआ है. अब नियुक्त अधिकारियों के हाईकोर्ट पहुंचने से यह मामला कानूनी मोर्चे पर भी पहुंच गया है.
इन वकीलों के जरिए रखा जाएगा पक्ष
याचिकाकर्ताओं की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अर्पण मिश्रा और अंकित विशाल पक्ष रखेंगे. याचिकाकर्ता अदालत के सामने सरकार के आदेश से जुड़े तथ्यों और नियुक्तियों पर उसके प्रभाव को रखेंगे. अब सबसे अहम सवाल यह है कि हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई के दौरान नवनियुक्त अधिकारियों को कोई अंतरिम राहत देता है या नहीं. साथ ही सरकार के उस आदेश पर अदालत की क्या टिप्पणी होती है, जिसके तहत JSSC की परीक्षाओं और JSSC CGL के बाद हुई नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया है. फिलहाल याचिका सूचीबद्ध होने का इंतजार है. अगर अदालत जल्द सुनवाई के लिए मामले को स्वीकार करती है, तो JSSC CGL से जुड़े विवाद में एक नया कानूनी मोड़ आ सकता है.