झारखंड में आयुष चिकित्सा को मिलेगा बड़ा बूस्ट, सरकार ने मंजूर किए 148 करोड़ रुपये
झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत 148.03 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है. इस राशि से आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी समेत आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा.
रांची (RANCHI): झारखंड में आयुष चिकित्सा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत 148.03 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है. इस राशि का इस्तेमाल राज्य में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी और अन्य आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा.
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने 10 अगस्त 2026 को इस संबंध में स्वीकृति पत्र जारी किया. सरकार का लक्ष्य आयुष चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के साथ इन्हें आम लोगों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाना है.
केंद्र देगा 96 करोड़, राज्य की हिस्सेदारी 52 करोड़
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत स्वीकृत कुल राशि में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की हिस्सेदारी होगी. केंद्र सरकार की ओर से 96 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जबकि झारखंड सरकार 52.03 करोड़ रुपये का योगदान देगी. इस तरह योजना के लिए केंद्र की हिस्सेदारी 60 फीसदी और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 40 फीसदी होगी. सरकार के मुताबिक, बजट का इस्तेमाल आयुष से जुड़ी विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थानों और योजनाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा. इससे लोगों को आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों की सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

SNA SPARSH से होगी राशि की निकासी
स्वीकृत बजट के इस्तेमाल के लिए SNA SPARSH व्यवस्था लागू की गई है. इसके जरिए योजना की राशि को जरूरत के मुताबिक संबंधित स्तर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी. यह प्रणाली ई-कुबेर और भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से संचालित होगी. सरकार ने राशि की निकासी और खर्च के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की है. राज्य स्तर पर उप निदेशक यूनानी और जिला स्तर पर संबंधित जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी को राशि के उपयोग की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं, पूरे बजट की निगरानी और नियंत्रण स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के स्तर से किया जाएगा.
खर्च में पारदर्शिता पर सरकार का जोर
सरकार ने साफ किया है कि स्वीकृत राशि का इस्तेमाल निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार ही किया जाना चाहिए. अधिकारियों को योजना के तहत खर्च की गई रकम का उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर भारत सरकार, महालेखाकार और राज्य स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा भारतीय अंकेक्षण एवं लेखा विभाग और राज्य वित्त विभाग को योजना के तहत हुए खर्च और संबंधित खातों की जांच का अधिकार रहेगा. इससे बजट के इस्तेमाल की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. सरकार के इस फैसले से झारखंड में आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है. खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में लोगों को वैकल्पिक चिकित्सा सुविधाओं तक बेहतर पहुंच देने की दिशा में यह बजट महत्वपूर्ण माना जा रहा है.