रांची के उर्सलाइन कॉन्वेंट में नेत्रदान को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान, सैकड़ों छात्राओं ने पेंटिंग से दिया संदेश

रांची के उर्सलाइन कॉन्वेंट स्कूल में 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत पेंटिंग प्रतियोगिता और जागरूकता सेमिनार आयोजित हुआ. विशेषज्ञों ने नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने की अपील की.

रांची के उर्सलाइन कॉन्वेंट में नेत्रदान को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान, सैकड़ों छात्राओं ने पेंटिंग से दिया संदेश

रांची (RANCHI): 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत बुधवार को उर्सलाइन कॉन्वेंट स्कूल, रांची में पेंटिंग प्रतियोगिता और नेत्रदान जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया. यह कार्यक्रम 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलने वाले नेत्रदान पखवाड़े के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड, कश्यप मेमोरियल आई बैंक और आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक शशि प्रकाश झा रहे. प्रतियोगिता में स्कूल की सैकड़ों छात्राओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया. छात्राओं ने अपनी पेंटिंग के जरिए नेत्रदान के महत्व और इससे जुड़ा जागरूकता संदेश लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया.

पेंटिंग प्रतियोगिता के बाद नेत्रदान को लेकर जागरूकता सेमिनार आयोजित हुआ. इसमें एनएचएम के निदेशक शशि प्रकाश झा, अनिमा किस्कु और उर्सलाइन कॉन्वेंट की प्राचार्या सिस्टर ग्रेस मौजूद रहीं. सेमिनार में विशेषज्ञों ने छात्राओं को नेत्रदान की प्रक्रिया, इसके महत्व और समाज में प्रचलित भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी.

प्रख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भारती कश्यप और कॉर्निया प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. निधि गडकर कश्यप ने नेत्रदान से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं. डॉ. भारती कश्यप ने कहा कि सही जानकारी के अभाव में लोग नेत्रदान को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं रखते हैं. उन्होंने बताया कि नेत्रदान के लिए उम्र, लिंग या ब्लड ग्रुप को लेकर कोई अनिवार्यता नहीं है. मोतियाबिंद की सर्जरी करा चुके लोग भी नेत्रदान कर सकते हैं.

उन्होंने बताया कि नेत्रदान की प्रक्रिया नि:शुल्क होती है और इसे पूरा करने में सामान्यतः 15 से 20 मिनट लगते हैं. इसके लिए टीम जरूरत पड़ने पर डोनर के घर भी पहुंच सकती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया के बाद अंतिम संस्कार में देरी नहीं होती और कृत्रिम आंख लगाए जाने पर चेहरे की सामान्य बनावट में कोई खास बदलाव नहीं आता.

एनएचएम निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि राज्य में नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए अस्पतालों में काउंसलर्स की व्यवस्था, कॉर्निया प्राप्त करने के लिए 4 से 6 घंटे के भीतर सक्रिय होने वाला हेल्पलाइन नेटवर्क और डोनर परिवारों के सम्मान की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा.

डॉ. निधि गडकर कश्यप ने बताया कि वर्ष 2019 से अब तक कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में 500 से अधिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं. इनमें आधुनिक DSEK और DMEK तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो कॉर्नियल दृष्टिहीन लोगों को रोशनी मिल सकती है. कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना रहा.