JPSC-JSSC विवाद के बीच विधानसभा में सरकार का बड़ा दावा, मंत्री बोले- 98 फीसदी मांगें मानी गईं
JPSC-JSSC विवाद के बीच झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र में सरकार ने छात्रों की मांगों पर अपना पक्ष रखा. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि सरकार ने 98 फीसदी मांगें मान ली हैं.
रांची (RANCHI): एक तरफ JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र में इस मुद्दे पर सरकार ने अपना पक्ष रखा है. विधानसभा सत्र के तीसरे दिन विधायक अरूप चटर्जी ने आंदोलनरत छात्रों के साथ सरकार की हुई बातचीत का पूरा ब्योरा सदन में रखने की मांग की. इसके जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार की ओर से छात्रों के साथ हुई वार्ता और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी. मंत्री ने दावा किया कि सरकार ने आंदोलन कर रहे छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगों को मान लिया है. उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ रही है और इस दिशा में उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया गया है.
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन में बताया कि उच्चस्तरीय समिति ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उनकी मांगों को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा है. इनमें परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और भविष्य में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार करना शामिल है. उन्होंने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए SIT पहले से काम कर रही है और जरूरत पड़ने पर सरकार ED से भी जांच कराने को तैयार है. वहीं, विवादित आउटसोर्स एजेंसी से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने पर भी सरकार ने सहमति जताई है. JSSC CGL मामले पर मंत्री ने कहा कि मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. सरकार ने छात्रों के सामने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन छात्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया.
वहीं, भर्ती परीक्षाओं में सुधार को लेकर सरकार नई SOP तैयार करने की तैयारी में है. मंत्री ने बताया कि परीक्षा व्यवस्था को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए IIT, IIM रांची और XLRI जमशेदपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से सुझाव लेने का प्रस्ताव है. दूसरी ओर, सरकार ने BJP पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक दिशा देकर भटकाने का आरोप लगाया है. सत्ता पक्ष का कहना है कि छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जा सकता है और आंदोलन को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. मंत्री ने आंदोलनरत छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत से करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि आंदोलन के दौरान हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.