दिल्ली में कृषि सम्मेलन, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने उठाईं झारखंड के किसानों की समस्याएं

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने झारखंड के किसानों की समस्याएं और कृषि से जुड़ी कई मांगें केंद्र सरकार के सामने रखीं.

दिल्ली में कृषि सम्मेलन, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने उठाईं झारखंड के किसानों की समस्याएं

रांची(RANCHI): नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में झारखंड की कृषि और किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए. झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सम्मेलन में राज्य के किसानों की समस्याओं और सरकार की जरूरतों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि झारखंड की खेती की स्थिति दूसरे राज्यों से अलग है, इसलिए केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करते समय झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए. मंत्री ने किसान आईडी बनाने में आ रही परेशानी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि झारखंड में जमीन का आखिरी बड़ा सर्वे 1932 में हुआ था. पुराने जमीन रिकॉर्ड और अभी की जमीन की स्थिति में अंतर होने के कारण कई किसानों की Farmer ID बनाने में परेशानी हो रही है. उन्होंने मांग की कि जब तक बड़ी संख्या में किसान आईडी नहीं बन जाती, तब तक इसे PM-KISAN जैसी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी नहीं किया जाए.

मंत्री ने राज्य में धान की खेती के बाद खाली रहने वाली जमीन का इस्तेमाल बढ़ाने की भी मांग की. उन्होंने बताया कि रबी के मौसम में झारखंड में करीब 12 लाख हेक्टेयर जमीन ऐसी रहती है, जहां धान की खेती के बाद दूसरी फसल लगाई जा सकती है. इसमें करीब 5 से 6 लाख हेक्टेयर जमीन पर दाल, तेलहन और बागवानी की फसलें उगाई जा सकती हैं. उन्होंने इसके लिए केंद्र से विशेष आर्थिक और तकनीकी मदद मांगी. मंत्री ने बताया कि राज्य में दलहन की खेती का क्षेत्र बढ़ा है. खरीफ 2025-26 में करीब 2.80 लाख हेक्टेयर के मुकाबले खरीफ 2026-27 में यह बढ़कर करीब 3.73 लाख हेक्टेयर हो गया. देवघर और दुमका में अरहर की खेती के बड़े क्लस्टर भी तैयार किए गए हैं.

शिल्पी नेहा तिर्की ने किसानों को KCC यानी किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने के लिए बैंकों को विशेष अभियान चलाने की मांग की. उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि मशीनों पर ज्यादा सब्सिडी देने की बात भी रखी और झारखंड में यह सहायता 90 प्रतिशत तक करने का सुझाव दिया. इसके अलावा रांची के पलांडू फार्म रिसर्च सेंटर को बागवानी और आदिवासी खेती पर राष्ट्रीय स्तर का शोध केंद्र बनाने का प्रस्ताव दिया. मंत्री ने कहा कि खेती को सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि किसानों की आय, तकनीक, बाजार और फूड प्रोसेसिंग से भी जोड़ना जरूरी है. उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को झारखंड आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया.