झारखंड के 606 थानों में अब रहेगा तीसरी नज़र का पहरा, 9 हजार CCTV कैमरों से होगी निगरानी
झारखंड के 606 पुलिस थानों में 9,006 हाईटेक CCTV कैमरे लगाए जाएंगे. ‘मिशन तीसरी आंख’ के तहत थानों की निगरानी, सुरक्षा और पारदर्शिता मजबूत करने की तैयारी है.
झारखंड के 606 पुलिस थानों में 9,006 हाईटेक CCTV कैमरे लगाए जाएंगे. ‘मिशन तीसरी आंख’ के तहत थानों की निगरानी, सुरक्षा और पारदर्शिता मजबूत करने की तैयारी है.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड के पुलिस थानों में अब सिर्फ पुलिसकर्मियों की निगाह नहीं, बल्कि कैमरों की ‘तीसरी आंख’ भी हर गतिविधि पर नजर रखेगी. फरियादियों की सुरक्षा से लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता तक, कई स्तरों पर बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी 606 पुलिस थानों में हाईटेक सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला लिया है. इस पूरी परियोजना के लिए 90 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. इस योजना का मकसद थानों में होने वाली गतिविधियों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए जवाबदेही बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों व अदालतों को महत्वपूर्ण फुटेज उपलब्ध कराना है. खास बात यह है कि कैमरों की संख्या बढ़ाने के साथ परियोजना की लागत में भी कमी की गई है.
9,006 कैमरों से होगी निगरानी
शुरुआती योजना में झारखंड पुलिस के लिए 8,854 कैमरे लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था. इसके लिए जैप-आईटी ने करीब 134 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया था, जिसे वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रशासनिक मंजूरी भी मिली थी. बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से केरल के आधुनिक कंट्रोल रूम मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया गया. इसके आधार पर जैप-आईटी ने नया डीपीआर 3.0 तैयार किया. संशोधित योजना में कैमरों की संख्या बढ़ाकर 9,006 कर दी गई, जबकि परियोजना की लागत घटकर 90 करोड़ रुपये हो गई. यानी पहले के मुकाबले कम लागत में ज्यादा कैमरे और बेहतर तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराने की तैयारी है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप थानों के महत्वपूर्ण हिस्सों को कैमरों की निगरानी में लाया जाएगा. मुख्य प्रवेश और निकास द्वार, हवालात के गलियारे, रिसेप्शन, लॉबी, बरामदे, थाना प्रभारी के कमरे, ड्यूटी ऑफिसर के कमरे, टॉयलेट के बाहर का हिस्सा और थाने के पीछे के परिसर में कैमरे लगाए जाएंगे. कैमरों में दिन के साथ रात में भी स्पष्ट रिकॉर्डिंग की सुविधा होगी. ऑडियो और वीडियो दोनों रिकॉर्ड किए जा सकेंगे, जिससे किसी घटना की स्थिति में पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी.
परियोजना के तहत तैयार होने वाली सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को न्यूनतम एक वर्ष और अधिकतम 18 महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी. जरूरत पड़ने पर अदालत, जांच एजेंसी या संबंधित अधिकारी इस रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल कर सकेंगे. थानों में 4 मेगापिक्सल के 5,012 डोम कैमरे अंदरूनी हिस्सों में लगाए जाएंगे. वहीं बाहरी परिसर की निगरानी के लिए 3,388 बुलेट कैमरे लगाए जाएंगे. प्रत्येक थाना के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक-एक 4 मेगापिक्सल मोटराइज्ड वेरिफोकल कैमरा लगाया जाएगा. इस तरह कुल 9,006 कैमरों से निगरानी व्यवस्था तैयार होगी.
यह परियोजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच चरणों में लागू की जाएगी. पहले साल कैमरों की खरीद, स्थापना और कमीशनिंग के लिए 52.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके बाद तकनीकी सहायता, संचालन, रखरखाव और नेटवर्क विस्तार के लिए अगले वर्षों में बजट निर्धारित किया गया है. जिला स्तर पर 24 जिलों के कंट्रोल रूम को 300 एमबीपीएस हाई-स्पीड इंटरनेट के जरिए थानों से जोड़ा जाएगा. इससे संबंधित अधिकारी जरूरत के अनुसार थानों की निगरानी कर सकेंगे. कैमरों की खरीद और स्थापना की जिम्मेदारी जैप-आईटी रांची को दी जाएगी, जो निविदा प्रक्रिया के माध्यम से पूरी व्यवस्था को लागू करेगा.
पुलिस मुख्यालय की ओर से एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो जैप-आईटी और थानों के बीच समन्वय का काम करेंगे. वहीं डीजीपी और आईटी सचिव परियोजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति की नियमित समीक्षा करेंगे. इस तरह ‘मिशन तीसरी आंख’ के जरिए झारखंड के पुलिस थानों में निगरानी, रिकॉर्डिंग और जवाबदेही की एक नई तकनीकी व्यवस्था तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है.