पलामू के VC पर क्यों गिरी गाज! राजभवन की कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी में DK सिंह के कारनामे उजागर

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ दिनेश कुमार सिंह पर राजभवन ने वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी है.

पलामू के VC पर क्यों गिरी गाज! राजभवन की कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी में DK सिंह के कारनामे उजागर

पलामू (PALAMU): पलामू का नीलांबर पीताम्बर विश्वविद्यालय यूं तो अपनी उपलब्धियों के लिए चर्चा में रहता ही है पर बीते कुछ महीनों से यूनिवर्सिटी के कुलपति के कारण यह संस्थान खासा सुर्खियां बटोरती आई है. यहां के कुलपति के कारनामों की लिस्ट इतनी लंबी है की अब अंततः राज्यपाल द्वारा उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है. ऐसे में अब नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ दिनेश कुमार सिंह उर्फ DK सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दरअसल कुलपति के खिलाफ लगातार सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों, विशेष ऑडिट में दर्ज गंभीर आपत्तियों और लोकभवन के निर्देशों के कथित अनुपालन नहीं किए जाने से जुड़े मामलों के बाद राजभवन ने यह कदम उठाया है.

बताते चलें कि राज्यपाल के निर्देश पर झारखंड वित्त विभाग ने नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय का विशेष ऑडिट कराया था. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऑडिट में 3 मार्च 2025 से जनवरी 2026 के बीच विश्वविद्यालय में हुए कुल 47 करोड़ 21 लाख 16 हजार रुपये के खर्च से जुड़े मामलों की जांच की गई. इस दौरान कई वित्तीय लेन-देन और भुगतान को लेकर ऑडिट टीम ने आपत्तियां दर्ज की हैं. रिपोर्ट में 19 लाख 64 हजार 126 रुपये की राशि को वसूली योग्य बताया गया है. विशेष ऑडिट रिपोर्ट में करीब पांच करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े कई मामलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ दिनेश कुमार सिंह के कार्यकाल में किया गया 1 करोड़ 10 लाख 20 हजार 752 रुपये का एक भुगतान ऑडिटर की टिप्पणी में गबन की श्रेणी में रखा गया है. हालांकि, यह ऑडिट की आपत्ति है और संबंधित पक्ष का जवाब तथा सक्षम स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होगी.

इसी तरह एकरारनामा से अलग अनियमित बीजक पेश किए जाने से जुड़े मामले में 1 करोड़ 51 लाख 39 हजार 128 रुपये की जीएसटी राशि पर सवाल उठाए गए हैं. वहीं, विश्वविद्यालय में डिजिटलीकरण के नाम पर एनसीसीएफ को किए गए 2 करोड़ 68 लाख 73 हजार 790 रुपये के भुगतान को भी ऑडिट में अनियमित बताया गया है. इसके अलावा विश्वविद्यालय के अन्य वित्तीय लेन-देन को लेकर भी रिपोर्ट में आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है.

इधर कुलपति डॉ दिनेश कुमार सिंह के खिलाफ पलामू सांसद वीडी राम ने भी राज्यपाल को लिखित शिकायत दी थी. इसके बाद 2 सितंबर 2026 को एनएसयूआई के अमरनाथ तिवारी और अभिषेक तथा आपसू के राहुल कुमार दुबे और कमलेश कुमार ने भी राजभवन में शिकायत दर्ज कराई. शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने कुलपति से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी राजभवन को सौंपे हैं. कुलपति डॉ दिनेश कुमार सिंह का विवादों से जुड़ना नया नहीं है. इससे पहले रांची विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार संभालने के दौरान भी बिना अनुमति वित्तीय खर्च किए जाने को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई हुई थी. इसके बाद उनसे रांची विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया था.

राजभवन की ताजा कार्रवाई के बाद नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. खासकर विशेष ऑडिट में सामने आई वित्तीय आपत्तियों और कुलपति के खिलाफ राजभवन में की गई शिकायतों ने मामले को गंभीर बना दिया है. राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने स्पष्ट किया है कि डॉ दिनेश कुमार सिंह के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार अगले आदेश तक रोके गए हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें तत्काल कुलपति के पद से हटाया गया है. उनका कुलपति के रूप में करीब डेढ़ वर्ष का कार्यकाल अभी शेष बताया जा रहा है. फिलहाल राजभवन की कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय के वित्तीय फैसलों और प्रशासनिक कामकाज को लेकर निगाहें आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं. विशेष ऑडिट में दर्ज आपत्तियों पर संबंधित पक्ष का जवाब, शिकायतों की जांच और राजभवन की ओर से आगे लिया जाने वाला फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा.