पलामू (PALAMU): पलामू जिले के हुसैनाबाद अनुमंडल स्थित सोहया पहाड़ी में कथित अवैध स्टोन माइनिंग और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर मामला एक बार फिर गरमा गया है. झारखंड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और हुसैनाबाद के पूर्व विधायक कमलेश कुमार सिंह ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
अपने आवेदन में कमलेश कुमार सिंह ने कहा है कि सोहया पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान और हजारों किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है. लगातार हो रही खनन गतिविधियों के कारण पहाड़ी का स्वरूप बदल रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने के साथ-साथ कृषि भूमि और जल स्रोतों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ रही है.
उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से खनन कार्यों का विरोध करते रहे हैं और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर चिंता जता रहे हैं. हाल ही में खनन क्षेत्र में बने एक गहरे जलभराव वाले गड्ढे में युवक की डूबने से हुई मौत ने सुरक्षा मानकों और खनन गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पूर्व मंत्री ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र में ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ खनन पट्टों की वैधता समाप्त होने के बावजूद वहां कथित रूप से खनन जारी है. साथ ही समाप्त लीज वाले क्षेत्रों में विस्फोटक सामग्री ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही की भी सूचनाएं सामने आई हैं. यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह कानून और पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा.
कमलेश कुमार सिंह ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए. उन्होंने खनन संचालकों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने की आवश्यकता बताई है. उन्होंने NGT से सभी स्टोन माइनिंग लीज, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनुमतियों की समीक्षा कराने, पर्यावरणीय क्षति का वैज्ञानिक आकलन करने तथा जांच पूरी होने तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के हित में प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा करना बेहद जरूरी है. सोहया पहाड़ी को बचाने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है.


