पलामू: छुट्टी के बदले रिश्वत का आरोप पड़ा भारी! गर्भवती शिक्षिका केस में दो लिपिकों पर गिरी गाज

पलामू: छुट्टी के बदले रिश्वत का आरोप पड़ा भारी! गर्भवती शिक्षिका केस में दो लिपिकों पर गिरी गाज

पलामू (PALAMU): गर्भवती शिक्षिका भारती पांडेय से अवकाश स्वीकृत करने के बदले कथित रिश्वत मांगने और गर्भस्थ शिशु की मौत से जुड़े मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. उपायुक्त (डीसी) के निर्देश पर जिला शिक्षा कार्यालय के दो कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है. शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एक लिपिक का प्रतिनियोजन रद्द कर दिया गया है, जबकि दूसरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, लिपिक अरुण कुमारी गिरी का प्रतिनियोजन समाप्त कर दिया गया है, जबकि ईश्वरी दयाल राम को निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई शिक्षिका की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है.

भारती पांडेय ने उपायुक्त को दिए अपने आवेदन में आरोप लगाया था कि चिकित्सकों ने उन्हें गर्भावस्था के दौरान आराम करने की सलाह दी थी. इसके बावजूद अवकाश के लिए आवेदन देने के बाद भी उन्हें छुट्टी नहीं दी गई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवकाश स्वीकृत करने के लिए ₹50,000 की रिश्वत मांगी गई और उन्हें बार-बार जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े. परिजनों के मुताबिक, 25 जुलाई को भारती पांडेय अवकाश संबंधी प्रक्रिया पूरी कराने डीईओ कार्यालय पहुंची थीं. इसी दौरान कार्यालय परिसर में उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि गर्भ में ही शिशु की मौत हो चुकी थी.

घटना के बाद शिक्षिका के पति ने शहर थाना में आवेदन देकर जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की. आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अवकाश नहीं मिलने, कथित रिश्वत की मांग और लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने से शिक्षिका को मानसिक और शारीरिक तनाव झेलना पड़ा, जिसका गंभीर परिणाम गर्भस्थ शिशु की मौत के रूप में सामने आया. इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ा. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने त्वरित जांच कर दो कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की. हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रिश्वत मांगने समेत अन्य गंभीर आरोपों की जांच अभी जारी है. यदि जांच में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी.