पलामू में पुलिस जांच पर DIG का एक्शन, 11 केसों में लापरवाही पर DSP समेत 5 अफसरों को शोकॉज
पलामू में आर्म्स एक्ट और फायरिंग के 11 मामलों की जांच में लापरवाही मिलने पर DIG किशोर कौशल ने एक DSP और चार सब-इंस्पेक्टरों को शोकॉज जारी किया है.
पलामू में आर्म्स एक्ट और फायरिंग के 11 मामलों की जांच में लापरवाही मिलने पर DIG किशोर कौशल ने एक DSP और चार सब-इंस्पेक्टरों को शोकॉज जारी किया है.
पलामू (PALAMU): जिले में गंभीर आपराधिक मामलों की जांच में लापरवाही को लेकर डीआईजी किशोर कौशल ने सख्त रुख अपनाया है. आर्म्स एक्ट और फायरिंग से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान जांच में कई खामियां सामने आने के बाद एक डीएसपी और चार सब-इंस्पेक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. अधिकारियों को तय प्रक्रिया के तहत अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है.
तीन थानों के 11 मामलों की हुई जांच
डीआईजी किशोर कौशल ने मेदिनीनगर टाउन, मेदिनीनगर सदर और चैनपुर थाना क्षेत्रों में दर्ज आर्म्स एक्ट और फायरिंग से जुड़े मामलों की विस्तृत समीक्षा की. इस दौरान कुल 11 केस की फाइलों की जांच की गई. इनमें मेदिनीनगर टाउन थाना के पांच, सदर थाना के तीन और चैनपुर थाना के तीन मामले शामिल थे. समीक्षा के दौरान सामने आया कि इनमें से कई मामले सुजीत सिन्हा गिरोह से जुड़े हुए हैं. संवेदनशील मामलों को देखते हुए डीआईजी ने केस की जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई से संबंधित बिंदुओं पर अधिकारियों से जानकारी ली.
कई मामलों में जांच की रफ्तार पर उठे सवाल
केस फाइलों की जांच के दौरान पुलिस अनुसंधान में कई स्तर पर कमियां सामने आईं. कुछ मामलों में मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे, लेकिन उनके साथ कथित तौर पर जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई नहीं की गई थी. वहीं, कुछ मामलों में नामजद आरोपी गिरफ्तारी से बचते हुए बाहर घूम रहे थे. ऐसे आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की कार्रवाई भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाई गई. समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि जेल से जमानत पर बाहर आए कुख्यात अपराधियों की गतिविधियों पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखी जा रही थी. गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल आरोपियों के खिलाफ क्राइम कंट्रोल एक्ट के तहत प्रस्ताव भेजने में भी अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई.
डीआईजी की समीक्षा में कई मामलों की प्रगति रिपोर्ट डीएसपी स्तर पर लंबे समय से लंबित पाई गई. पर्यवेक्षण में देरी और केस की मॉनिटरिंग में कमी को भी गंभीरता से लिया गया. इसी आधार पर संबंधित डीएसपी से स्पष्टीकरण मांगा गया है. अधिकारियों से यह पूछा गया है कि संवेदनशील मामलों की जांच और निगरानी में इतनी देरी क्यों हुई.
इन चार सब-इंस्पेक्टरों से मांगा गया जवाब
जांच में लापरवाही को लेकर जिन सब-इंस्पेक्टरों से जवाब मांगा गया है, उनमें कौलेश्वर प्रसाद, तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर सदर थाना, तंजीलूल मन्नान, तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर टाउन थाना और वर्तमान प्रभारी हैदरनगर थाना, चंद्रशेखर यादव, तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर टाउन थाना और वर्तमान प्रभारी किशनपुर ओपी तथा सुबोध कुमार, सब-इंस्पेक्टर टाउन थाना शामिल हैं. इन अधिकारियों से केस के अनुसंधान में हुई देरी और सामने आई कमियों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है. डीआईजी की इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप है. अब अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी. साथ ही संवेदनशील मामलों की जांच में लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए निगरानी और पर्यवेक्षण को और सख्त किए जाने के संकेत हैं.