कोडरमा (KODERMA): जिले में लंबे समय से बकाया मानदेय का भुगतान नहीं होने से नाराज आउटसोर्सिंग कर्मियों का गुस्सा गुरुवार को सड़कों पर फूट पड़ा. सदर अस्पताल और जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत करीब 360 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के मुख्य गेट को करीब दो घंटे तक जाम रखा और सरकार व स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. बाद में सिविल सर्जन से वार्ता और एक सप्ताह के भीतर भुगतान का आश्वासन मिलने पर आंदोलन स्थगित कर दिया गया.
प्रदर्शन से पहले कर्मियों ने सदर अस्पताल के न्यू लैब परिसर से जुलूस निकाला. इस दौरान "आवंटन मिलने के बावजूद भुगतान क्यों?", "स्वास्थ्य विभाग जवाब दो" और "कमांडो कंपनी होश में आओ" जैसे नारों के साथ प्रशासन और आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ आक्रोश जताया गया.
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने कहा कि कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर पिछले एक महीने से लगातार आंदोलन चल रहा है. उन्होंने बताया कि 1 जून से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को सिविल सर्जन की अध्यक्षता में हुई त्रिपक्षीय वार्ता के बाद इस शर्त पर स्थगित किया गया था कि आवंटन मिलते ही सभी कर्मियों का बकाया मानदेय जारी कर दिया जाएगा. लेकिन आवंटन प्राप्त होने के दो सप्ताह बाद भी भुगतान नहीं किया गया, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है.
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की घोषणा के बाद ही विभागीय स्तर पर फाइलों की प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि इससे पहले मामला लंबित रखा गया था. उन्होंने कहा कि वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. कई कर्मियों के पास रोजमर्रा का खर्च चलाने तक के पैसे नहीं हैं. कोई बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं कर पा रहा है तो कोई मकान का किराया देने में असमर्थ है.
सीटू ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मानदेय का भुगतान नहीं किया गया तो 17 जुलाई से जिले के सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. संगठन ने कहा कि कर्मचारियों को उनका अधिकार मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा. धरना-प्रदर्शन में जिला आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल रहे.
रिपोर्ट : अरुण बरनवाल

