जामताड़ा (JAMTARA): जामताड़ा सदर अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (JSHSA) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए जिला प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो पूरे जिले में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी स्वास्थ्य सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा.
एसोसिएशन की ओर से जामताड़ा उपायुक्त को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि 16 जुलाई 2026 को सदर अस्पताल, जामताड़ा से एक हाई-रिस्क गर्भवती महिला को उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया था. दुर्भाग्यवश रास्ते में महिला की मौत हो गई. इसके बाद कुछ लोगों ने महिला का शव वापस सदर अस्पताल लाकर अस्पताल परिसर में हंगामा किया. पत्र के अनुसार, मृतका के परिजनों और अन्य लोगों ने अस्पताल परिसर में चिकित्सकों, महिला डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों तथा होमगार्ड जवानों के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की. इतना ही नहीं, अस्पताल की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है. इस घटना के बाद अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया और चिकित्सकों में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है.
एसोसिएशन ने बताया कि अस्पताल उपाधीक्षक की ओर से संबंधित थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है. बावजूद इसके, घटना के बाद से अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. संगठन का कहना है कि इससे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों में असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है. झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और जूनियर डॉक्टर नेटवर्क समेत चिकित्सकों के विभिन्न संगठनों ने भी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
संगठन ने स्पष्ट किया है कि राज्य मुख्यालय के निर्देश पर जामताड़ा जिला इकाई ने आरोपियों की गिरफ्तारी तक आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी स्वास्थ्य सेवाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया है. साथ ही प्रशासन को 72 घंटे का अंतिम अवसर दिया गया है. यदि इस अवधि के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. एसोसिएशन ने उपायुक्त से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आरोपियों की गिरफ्तारी, उनके विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई तथा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के बिना बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं संभव नहीं हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है.
