जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): राज्य में मानसून के आगमन के करीब दो सप्ताह पूरे हो गए हैं. मानसून आने के बाद भी अब तक उम्मीद से काफी कम बारिश हुई है. पिछले साल जहां जून के महीने में रिकॉर्ड बारिश हुई थी वहीं इस साल अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. बारिश नहीं होने के कारण किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई है. धान का बिचड़ा तैयार हो गया है लेकिन बारिश नहीं होने के कारण किसान धनरोपनी नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में बारिश के लिए झारखंड में पहाड़ पूजा का सिलसिला शुरू हो गया है. रविवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड में पहाड़ पूजा हुई. 12 मौजा के ग्रामीणों ने जामीरा पहाड़ की पूजा की. पहाड़ की पूजा क्षेत्र और राज्य में अच्छी बारिश के लिए की गई. पारंपरिक वेशभूषा में लोग पहुंचे और अच्छी बारिश की पूजा की. लोगों की मान्यता है कि पहाड़ की पूजा करने से अच्छी बारिश होती है. धान का फसल भी अच्छा तैयार होता है.
राज्य की सबसे बड़ी पहाड़ पूजा 4 को
राज्य की सबसे बड़ी पहाड़ पूजा पूर्वी सिंहभूम जिले में की जाती है. चाकुलिया प्रखंड में स्थित कान्हाईश्वर पहाड़ की पूजा इस बार 4 जुलाई को होगी. कमेटी की ओर से पूजा की तैयारी शुरू कर दी गई है. कान्हाईश्वर के अलावा यहां कुल 6 पहाड़ों की पूजा होती है. जमीरा, सातनाला, गोटाशिला, खोड़ीपहाड़ी, घोटिडूबा पहाड़ की पूजा भी धूमधाम से की जाती है. लोग अच्छी बारिश और अच्छी फसल के लिए पहाड़ों की पूजा करते है. पूजा के बाद बारिश नहीं होने पर पहाड़ों की पूजा दोबारा की जाती है. पूजा के दौरान बलि भी दी जाती है. कान्हाईश्वर पहाड़ पूजा के अलावा गोटाशिला पहाड़ पूजा के दौरान भी आस्था का अनोखा संगम देखने मिलता है. यहां भी तीन राज्यों के श्रद्धालु पूजा के लिए पहुंचते है. हजारों की भीड़ पूजा के लिए पहुंचती है. गोटाशिला पहाड़ माटियाबांधी पंचायत के घाघरा गांव स्थित है. यहां पहाड़ पूजा 7 जुलाई को की जाएगी.
राज्य में 62 प्रतिशत कम बारिश
राज्य में अब तक सामान्य से 62 प्रतिशत कम बारिश हुई है. अब तक 170.3 एमएम बारिश होनी चाहिए थी लेकिन अब तक सिर्फ 65.5 एमएम बारिश ही रिकॉर्ड की गई है. ऐसे में पहाड़ पूजा से लोगों को उम्मीद है कि अब अच्छी बारिश होगी. बारिश नहीं होने के कारण गर्मी से भी लोग बेहाल हैं. उमस काफी परेशान कर रही है. इसी बीच मौसम विभाग ने कुछ राहत भरी खबर दी है. तेज हवा और बारिश को लेकर यह को अलर्ट जारी किया गया है.

