जमशेदपुर: पटमदा में खनन बंद करो के नारों से गूंजा डीसी ऑफिस, सैकड़ों ग्रामीणों ने किया घेराव

जमशेदपुर: पटमदा में खनन बंद करो के नारों से गूंजा डीसी ऑफिस, सैकड़ों ग्रामीणों ने किया घेराव

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): मंगलवार को दोपहर जमशेदपुर डीसी ऑफिस पटमदा में खनन बंद करो कि नारों से गूंज उठा. इसके अलावा क्रशर भगाओ फेफड़े और खेत बचाओ, हमारा गांव हमारा राज है, ना लोकसभा ना विधानसभा सबसे बड़ा ग्राम सभा समेत अन्य नारें भी खूब लगे. दरअसल, पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड में पत्थर खनन के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण डीसी ऑफिस पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. आदिवासी महिलाएं व पुरुष पारंपरिक हथियार के साथ जुलूस की शक्ल में डीसी ऑफिस पहुंचे. प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की बेटी दुखनी सोरेन ने किया. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पत्थर खनन बंद कराने की मांग की. इधर, प्रदर्शन को लेकर डीसी ऑफिस के पास काफी मात्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया. 

विस्फोट से हादसे का खतरा

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा पटमदा के ओड़िया मौजा स्थित टोला लायाडीह, चिरूडीह और ओड़िया में लंबे से पत्थर खनन किया जा रहा है. खाता संख्या 624 के प्लॉट संख्या 4546 में 10 एकड़ और प्लॉट संख्या 988 में 8 एकड़ भूमि का उल्लेख है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निर्धारित क्षेत्र से कई गुना अधिक इलाके में करीब 20 वर्षों से खनन किया जा रहा है. खदान स्थल के आसपास विद्यालय, आवासीय घर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं. जबकि लायाडीह गांव के बीच से 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन भी गुजरती है. ऐसे में खनन के दौरान होने वाले विस्फोट से हादसे का खतरा बना रहता है. आरोप लगाया कि खनन को लेकर ग्रामसभा की सहमति भी नहीं ली गई. कहा कि पूर्व में भी इसकी शिकायत डीसी से की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. क्रशर बंद नहीं हुआ तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे.

भेड़ के साथ किया प्रदर्शन
ग्रामीण अपने साथ एक भेड़ को भी लेकर पहुंचे. जो एक पैर से कमजोर था. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पत्थर खनन के कारण उड़ने वाली धूल और प्रदूषण से स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है. इंसान के अलावे मवेशियों पर भी इसका असर दिख रहा है. गांव में दिव्यांग मवेशी पैदा हो रहे है. खनन को जल्द बंद नहीं किया गया तो इसका असर इंसानों पर भी होने लगेगा. क्रशर से उड़ती धूल के कारण बच्चों और बुजुर्गों में बीमारी का खतरा काफी बढ़ गया है. खबर लिखें जाने तक ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी था.