पूर्वी सिंहभूम में सोलर हब बनने का सपना अधर में लटका, जानिए क्या है कारण
पूर्वी सिंहभूम जिले को सोलर हब बनाने का सपना अब तक पूरा नहीं हो पाया है. यह योजना फिलहाल अधर में लटकता दिख रहा है. जिले में 50 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने की योजना थी. लेकिन प्लांट लगाने के लिए एक ही जगह पर 200 एकड़ जमीन नहीं मिलने के कारण यह योजना धरातल पर उतरती नहीं दिल रही है.
जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले को सोलर हब बनाने का सपना अब तक पूरा नहीं हो पाया है. यह योजना फिलहाल अधर में लटकता दिख रहा है. जिले में 50 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने की योजना थी. लेकिन प्लांट लगाने के लिए एक ही जगह पर 200 एकड़ जमीन नहीं मिलने के कारण यह योजना धरातल पर उतरती नहीं दिल रही है. जिले के 10 अंचलों में एक ही जगह पर 200 एकड़ जमीन नहीं मिल पा रही है. इसके कारण करीब तीन साल से योजना आगे नहीं बढ़ पाई है. इसके कारण अब इस परियोजना को पूर्वी सिंहभूम जिले के बाहर ले जाने पर विचार किया जा रहा है.
झारखंड रिन्युएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जरेडा) ने पूर्वी सिंहभूम में सोलर प्लांट लगाने की योजना तैयार की थी. लेकिन इसके लिए इसके लिए 200 एकड़ जमीन का एक जगह पर उपलब्ध होना जरूरी है. सरकारी जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटे होने के कारण यह शर्त पूरी नहीं हो पा रही है. कई जगहों पर सरकारी जमीन उपलब्ध है, लेकिन यह 15 से 25 एकड़ के बीच ही है. इसके अलावा उपलब्ध खाली जमीन का बड़ा हिस्सा वन विभाग के अधीन है.
स्थानीय स्तर पर बिजली मिलने की थी उम्मीद
यह परियोजना अगर शुरू होती तो बिजली व्यवस्था में सुधार होता. मानगो और घाटशिला क्षेत्र को स्थानीय स्तर पर बिजली मिलने की उम्मीद थी. इन दोनों जगहों पर 60 से 70 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है. पटमदा और बोड़ाम में जमीन मिलने पर मानगो क्षेत्र को फायदा मिलता, जबकि घाटशिला क्षेत्र को भी स्थानीय स्तर पर बिजली उपलब्ध हो पाती. जमीन नहीं मिलने से इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. बताया जा रहा है कि पोटका में करीब 22 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध है, लेकिन एक जगह पर बड़ा भूखंड नहीं है. इसी तरह गुड़ाबांदा में करीब 25 एकड़ जमीन उपलब्ध बताई गई है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा वन भूमि के अधीन है. डुमरिया-मुसाबनी में करीब 15 से 20 एकड़ जमीन उपलब्ध है, लेकिन यहां रैयती और वन भूमि की अधिकता है. जानकारी हो कि इस परियोजना में निजी जमीन खरीदने का प्रावधान नहीं है.
परियोजना की राह हुआ मुश्किल
सोलर प्लांट के लिए केवल सरकारी जमीन ही होनी चाहिए. ऐसे में 200 एकड़ जमीन एक जगह नहीं मिलने से परियोजना की राह मुश्किल हो गई है. इधर, ऊर्जा विभाग ने एक बार फिर उपायुक्त से जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट मांगी है. प्रशासन की ओर से जमीन की तलाश जारी है, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं मिल पाया है. अधिकारियों का कहना है कि जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन 250 एकड़ का बड़ा सरकारी जमीन एक जगह पर उपलब्ध नहीं है