गम्हरिया कांड के बहाने जयराम महतो के सवाल: बरवा अड्डा थानेदार सही थे कि हम,अब कहां गया पुलिस एसोसिएशन?

गम्हरिया कांड की "आग" पूरे झारखंड में फैल चुकी है. जगह-जगह आंदोलन हो रहे हैं. झारखंड पुलिस लोगों के निशाने पर है

गम्हरिया कांड के बहाने जयराम महतो के सवाल: बरवा अड्डा थानेदार सही थे कि हम,अब कहां गया पुलिस एसोसिएशन?

धनबाद(DHANBAD) : गम्हरिया कांड की  "आग"  पूरे झारखंड में फैल चुकी है.  जगह-जगह आंदोलन हो रहे हैं.  झारखंड पुलिस लोगों के निशाने पर है.  इसबीच चर्चित विधायक जयराम महतो ने धनबाद के बरवाअड्डा  थाना  विवाद को उछाल कर जनता से सवाल किया है कि क्या जयराम महतो का व्यवहार सही था अथवा गलत? झारखंड पुलिस एसोसिएशन से भी उनका सवाल है. रोज प्रदेश में सैकड़ो लोग पुलिस से प्रताड़ित होते हैं, गाली सुनते हैं, यहां तक कि जब महिला मदद की उम्मीद लेकर थाने जाती है, तो उनके  साथ गलत काम थाना परिसर में ही किया जाता है.  उसके बाद भी लोगों की चुप्पी नहीं टूटती है. 

दावा -जेएलकेएम पार्टी की वजह से मामला सार्वजनिक हुआ 

 जेएलकेएम  ही एकमात्र पार्टी थी कि इस मामले को लेकर आगे बढ़ी और अंततः मामला सार्वजनिक हुआ और कार्रवाई भी हुई.  इस घटना को लेकर धनबाद में भी पुतला दहन किया गया है.  इस घटना को शर्मनाक बताया गया, पुलिस की वर्दी पर गहरा दाग बताया गया.  कहा जा रहा है कि इस दाग को धोने में पुलिस को वर्षों वर्ष लग जाएंगे।  नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी सहित अन्य नेताओं ने इस घटना की कड़ी से कड़ी निंदा की है.  कहा है कि झारखंड में महिला डीजीपी रहते हुए महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार और बर्ताव समझ  से परे है.  इधर, जानकारी मिली है कि सरायकेला -खरसावां जिले के गम्हरिया थाने में महिला के साथ हुए गलत काम के मामले में रविवार को 9 और पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.  निलंबित दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. 

अब तक कुल 15 पुलिस कर्मियों पर हुआ है एक्शन 

 दो दिनों में 15 पुलिस कर्मियों पर गाज गिर चुकी है.  सरायकेला खरसावां के एसपी फिलहाल मनोज स्वर्गियारी हैं.   मामले की जांच एसआईटी  कर रही है.  पीड़िता की ओर से शनिवार को दी गई शिकायत के बाद पुलिस एक्शन तेज हुआ है. धनबाद में रविवार को इस घटना के खिलाफ पुतला दहन किया गया.  भाजपा विधायक राज सिन्हा  ने राज्य की महिला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि झारखंड में आज भी महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है.  घर से लेकर सड़क,सड़क  से लेकर दफ्तर और अब पुलिस थाने तक महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे है.  जिस पुलिस प्रशासन के कंधों पर महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाने की जिम्मेवारी है, इसी  पुलिस विभाग के कर्मी पर थाना परिसर में ही दुष्कर्म का आरोप चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है.