हेमंत सोरेन का 51वां जन्मदिन: नेमरा गांव से CM की कुर्सी तक, ऐसा रहा सियासी सफर
हेमंत सोरेन के 51वें जन्मदिन पर PM नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं. नेमरा गांव से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर आज झारखंड की सत्ता के शिखर तक पहुंच चुका है.
टीनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 51वां जन्मदिन हैं. 10 अगस्त 1975 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे हेमंत सोरेन के लिए इस बार का जन्मदिन कई मायनों में खास है. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं, तो दूसरी तरफ करीब एक साल पहले पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद हेमंत के कंधों पर राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी है. बता दें, शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को निधन हुआ था. उनके निधन के बाद हेमंत सोरेन ने भावुक होकर कहा था कि वह खुद को पूरी तरह खाली महसूस कर रहे हैं. अब गुरुजी के बिना यह पहला जन्मदिन है, जब हेमंत सोरेन को न सिर्फ मुख्यमंत्री के रूप में बल्कि पिता की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा है.

नेमरा गांव में हुआ जन्म, पिता शिबू सोरेन से मिली राजनीतिक विरासत
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. वह झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन के बेटे हैं. राजनीतिक परिवार से आने के कारण बचपन से ही उन्हें राज्य की राजनीति और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को करीब से समझने का अवसर मिला. हालांकि, समय के साथ हेमंत सोरेन ने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अपनी अलग पहचान भी बनाई. आज वह झारखंड की राजनीति में एक प्रमुख आदिवासी नेता के तौर पर स्थापित हैं और लंबे समय से राज्य की सत्ता के केंद्र में बने हुए हैं.

2009 में शुरू हुआ संसदीय राजनीतिक सफर
हेमंत सोरेन ने सक्रिय संसदीय राजनीति में कदम वर्ष 2009 में रखा. इसी साल वह झारखंड से राज्यसभा के सदस्य चुने गए. राज्यसभा सांसद के तौर पर उनका राजनीतिक सफर शुरू होने के बाद झामुमो में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई. सितंबर 2010 में उन्हें झारखंड का उपमुख्यमंत्री बनाया गया. इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाई और संगठन के भीतर भी अपनी पकड़ मजबूत की. जनवरी 2013 तक वह उपमुख्यमंत्री के पद पर रहे. इसके बाद राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया और हेमंत सोरेन को पहली बार मुख्यमंत्री पद संभालने का अवसर मिला.
2013 में पहली बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री
वर्ष 2013 में झामुमो, राजद और कांग्रेस के गठबंधन से बनी सरकार में हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनका पहला कार्यकाल 13 जुलाई 2013 से 23 दिसंबर 2014 तक रहा. इस दौरान उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी नेतृत्व क्षमता को स्थापित करने की कोशिश की. हालांकि, वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें दुमका सीट से हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने बरहेट विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की और विधानसभा में अपनी राजनीतिक स्थिति बनाए रखी. चुनाव के बाद जनवरी 2015 में उन्हें झारखंड विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया. विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने सरकार के खिलाफ लगातार राजनीतिक मोर्चा संभाले रखा और पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान दिया.

2019 में दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली
वर्ष 2019 का विधानसभा चुनाव हेमंत सोरेन के राजनीतिक करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ. झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनाव में बहुमत हासिल किया और हेमंत सोरेन दूसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने. इस चुनाव में उन्होंने दुमका और बरहेट दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की. इसके बाद उन्होंने गठबंधन सरकार का नेतृत्व संभाला. मुख्यमंत्री के रूप में उनके दूसरे कार्यकाल में कई राजनीतिक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर अपनी भूमिका मजबूत की. वर्ष 2022 में विधानसभा में विश्वास मत के दौरान भी उन्होंने अपनी सरकार का बहुमत साबित किया.
राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच मजबूत हुई पकड़
हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर सिर्फ सत्ता तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें कई उतार-चढ़ाव भी शामिल रहे हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें कई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने झारखंड की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखी. राज्य की आदिवासी राजनीति में उनकी मजबूत उपस्थिति, JMM संगठन पर प्रभाव और गठबंधन की राजनीति में उनकी भूमिका ने उन्हें झारखंड के प्रमुख नेताओं में शामिल किया. नेमरा गांव से शुरू हुआ उनका सफर आज झारखंड की सत्ता के शीर्ष तक पहुंच चुका है और वह अपने पिता शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरे के रूप में देखे जाते हैं.

पिता शिबू सोरेन के निधन के बाद बदली जिम्मेदारियां
झारखंड की राजनीति के दिग्गज नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. पिता के निधन के बाद हेमंत सोरेन के कंधों पर राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई. अब 10 अगस्त 2026 को उनका पहला जन्मदिन है, जब पिता उनके साथ नहीं हैं. ‘गुरुजी’ के बिना यह जन्मदिन हेमंत के लिए भावनात्मक होने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.