हजारीबाग में महिला की मौत पर कोर्ट सख्त, NTPC समेत 5 अधिकारियों पर FIR का आदेश

हजारीबाग में महिला की मौत मामले में CJM कोर्ट का बड़ा आदेश, NTPC और त्रिवेणी सैनिक माइनिंग के 5 अधिकारियों पर FIR के निर्देश.

हजारीबाग में महिला की मौत पर कोर्ट सख्त, NTPC समेत 5 अधिकारियों पर FIR का आदेश

हजारीबाग: मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत ने एक महिला की मौत से जुड़े मामले में राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) और त्रिवेणी सैनिक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के पांच अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है. यह आदेश परिवाद वाद संख्या 1543/2026 में धारा 156(3) के तहत दिया गया है. अदालत के निर्देश के बाद अब पुलिस को मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करनी होगी.

मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता पवन कुमार यादव ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा. उन्होंने उपलब्ध दस्तावेजों, घटनाक्रम और आरोपों को अदालत के सामने रखते हुए मामले की गंभीरता पर जोर दिया. अधिवक्ता की ओर से दलील दी गई कि उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया ऐसे बिंदु सामने आते हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान किया जाना आवश्यक है.

अदालत के आदेश के अनुसार, मामले में त्रिवेणी सैनिक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, बड़कागांव से जुड़े उत्तम झा और चंचल सिंह समेत NTPC लिमिटेड, बड़कागांव से जुड़े मुकेश कुमार, दीपक मोदी और प्रशांत सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है.

परिवादी अरुण कुमार साव, जो बड़कागांव थाना क्षेत्र के जुगरा गांव के रहने वाले हैं, ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी. उनके अनुसार, 22 फरवरी को दोपहर करीब एक बजे उनकी पत्नी प्रीति देवी, जिनकी उम्र लगभग 30 वर्ष थी, जुगरा डंपिंग एरिया के पास बकरियां चरा रही थीं.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित कंपनी की ओर से बिना उचित मुआवजा दिए जमीन पर ओवरबर्डन यानी मिट्टी-पत्थर डंप किया जा रहा था. प्रीति देवी ने कथित तौर पर इसका विरोध किया. इसी दौरान कंपनी के अधिकारियों के साथ उनका विवाद हुआ.

परिवादी का आरोप है कि अधिकारियों के निर्देश पर वहां पहले से खड़े मिट्टी लदे वाहन से प्रीति देवी के ऊपर ओवरबर्डन गिरा दिया गया. इसके मलबे में दबने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

घटना के बाद परिवार की ओर से पुलिस और संबंधित उच्चाधिकारियों को शिकायत देने का दावा किया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर मामला अदालत पहुंचा. सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु-समीक्षा रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला दिया. इन तथ्यों पर विचार करने के बाद CJM अदालत ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच करने का आदेश दिया है. अब पुलिस जांच में आरोपों की वास्तविकता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी.