गुमला में जंगली हाथियों का आतंक! जान-माल के नुकसान पर 10 लाख का मिलेगा मुआवजा

जंगली हाथियों की सक्रियता के कारण आम लोगों में काफी डर का माहौल बना हुआ है. कई बार तो जंगली हाथियों से अपनी फसल को बचाने के चक्कर में लोग अपनी जान तक गवा देते हैं.

गुमला में जंगली हाथियों का आतंक! जान-माल के नुकसान पर 10 लाख का मिलेगा मुआवजा

गुमला (GUMLA):  झारखंड के कई जिलों में हाथियों को लेकर परेशानियाँ बढ़ती जा रही है. अब तक हाथियों के झुंड ने कई ग्रामीणों के परिवार के लोगों को मौत के घाट उतार दिया तो कई के घर को तहस-नहस कर दिया. ऐसे में गुमला जिले के अलग अलग इलाकों में जंगली हाथियों का झुंड देखा गया. जंगली हाथियों की सक्रियता के कारण आम लोगों में काफी डर का माहौल बना हुआ है. कई बार तो जंगली हाथियों से अपनी फसल को बचाने के चक्कर में लोग अपनी जान तक गवा देते हैं. ऐसे में जंगली हाथियों की सक्रियता के बाद वन विभाग ऐक्टिव मोड में आ गई है.

वन विभाग की पूरी टीम के साथ जंगली हाथियों को भगाने में लगी रहती है लेकिन लोगों को कई बार सही रूप से जानकारी नहीं मिल पाने के कारण लोगों की सक्रियता उन्हें बेवजह परेशान कर देती है. इसी को लेकर डीएफओ अहमद बिलाल अनवर की माने तो उनका प्रयास है कि जंगली हाथियों की सक्रियता के बाद जहां लोगों की जान माल की क्षति को बचाया जा सके वही अगर किसी प्रकार से कोई नुकसान होता है तो ग्रामीणों को सरकार के द्वारा भरपूर सहायता दी जाती है.  ऐसे में लोगों को होने की जरूरत नहीं है.

साथ ही वन विभाग ने हाथियों से हुए नुकसान को लेकर भी बात कही.  डीएफओ ने कहा की नुकसान होने पर उचित मुआवजा दिया जाएगा ताकि ताकि पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद मिल सके. इसके साथ ही डीएफओ अहमद बिलाल अनवर ने बताया कि अगर जंगली हाथी की चपेट में आकर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसे 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा. मृत्यु होने के तीन दिन के अंदर 1 लाख की मदद दी जाती है और दो सप्ताह के अंदर 4 लाख का चेक भुगतान किया जाता है.

इसके साथ ही मृतक के आश्रित के नाम पर 5 लाख रुपए का 5 वर्षों के लिए बैंक में एफडी  कर दिया जाता है और वह पैसा उसके आश्रित को समय पर उपलब्ध हो जाती है. इसके साथ ही पीड़ित परिवार को सहायता राशि के रूप में 2हजार रुपए प्रति महीना बैंक के माध्यम से भुगतान किया जाता है. वहीं अगर जंगली जानवर से गंभीर रूप से व्यक्ति घायल हो जाए तो उसे 2 लाख रुपए, हल्की चोट लगने पर 35 हजार रुपए, पूरी तरह मकान के क्षतिग्रस्त होने पर 2 लाख रुपए, पक्का मकान डेढ़ लाख रुपए, साधारण मकान में 1 लाख 30 हजार की राशि उपलब्ध कराया जाता है.

वहीं जंगली जानवर द्वारा भंडारी अनाज की प्रति पूर्ति के लिए 3600 रुपए प्रति क्विंटल सहित कई तरह के भुगतान दिए जाते हैं.  ऐसे में लोगों को किसी प्रकार से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है उनके फसल की नुकसान के साथ-साथ जान मन और घरों के नुकसान को लेकर सरकार द्वारा प्राप्त मुआवजा उपलब्ध कराया जाता है. ऐसे में कभी भी जंगली जानवर अगर उनके इलाके में सक्रिय हो जाए तो उनसे ज्यादा भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है और ना ही उनके नजदीक जाने की आवश्यकता है.

डीएफओ ने स्पष्ट बताया कि कभी भी अगर इलाके में जंगली जानवर सक्रिय हो जाए तो इसकी सीधी सूचना वन विभाग के कर्मियों को सीधे वन प्रमंडल पदाधिकारी को दी जाए.

रिपोर्ट- सुशील कुमार सिंह